*BREAKING:*2017-18 और 2018 की रिक्तियों के एवज में वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के लिए एपीएआर और शास्तियों के साथ सतर्कता निकासी प्रमाणपत्र भेजना भी ज़रुरी *दिसम्बर,2018 में विभागीय पदोन्नति समिति की एक और बैठक के प्रयास ज़ोरों पर *उप-निदेशक(राजभाषा) के तौर पर पदोन्नति हेतु संयुक्त सेवावधि के प्रावधान को बहाल करने के लिए भर्ती नियमों में आशोधन की फाइल डीओपीटी को भेजे जाने की ख़बर *कनिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के आदेश जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में *एसोसिएशन ने कनिष्ठ अनुवादकों के लिए 4600/-रु. के ग्रेड-पे की मांग को लेकर अदालत जाने का निर्णय लिया;सभी संबंधितों से संगत दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का आग्रह।

Thursday, 27 March 2014

पदोन्नति का आचार-संहिता से कोई संबंध नहीं;एसोसिएशन ने विभाग को पत्र सौंपा

वरिष्ठ अनुवादकों की सहायक निदेशक के रूप में पदोन्नति में हो रहा विलम्ब संवर्ग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। एसोसिएशन द्वारा इस मुद्दे पर लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद कोई न कोई अड़चन आती रही है। 20 मार्च को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक निर्धारित थी, किंतु यह बैठक नहीं हुई। बहरहाल,एसोसिएशन ने वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के सिलसिले में दिनांक 25 मार्च को अपने कुछ वरिष्ठ अनुवादक साथियों के साथ सचिव से मुलाक़ात का प्रयास किया। सचिव ने संयुक्त सचिव से मुलाक़ात की सलाह दी किंतु संयुक्त सचिव महोदया अस्वस्थ थीं जिसके कारण एसोसिएशन ने निदेशक(राजभाषा) से मिलकर वस्तुस्थिति जाननी चाही। 

एसोसिएशन को बताया गया कि यह मामला चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण लंबित है। चूंकि एसोसिएशन को इसका अंदेशा था जिसके स्पष्टीकरण के लिए एसोसिएशन ने निर्वाचन आयोग में प्रधान सचिव से मुलाक़ात कर मामले के कानूनी पहलू संबंधी स्पष्टीकरण पहले ही ले लिया था, लिहाजा एसोसिएशन ने निदेशक महोदय को बताया कि यह मामला नई नियुक्ति से संबंधित न होकर,पदोन्नति मात्र से संबंधित है जो आचार संहिता के दायरे में नहीं आता। निदेशक महोदय को स्वयं डीओपीटी द्वारा आचार-संहिता लागू होने के बाद जारी किए गए पदोन्नति आदेश की प्रति दिखाई गई जिससे वे संतुष्ट दिखे किंतु उन्होंने संयुक्त सचिव की सहमति से ही इस मामले में किसी भी प्रकार के निर्णय पर पहुंचने की बात कही। संयुक्त सचिव महोदया अस्वस्थ हैं और छुट्टी पर हैं। उनके कार्यालय आते ही एसोसिएशन उन्हें तथ्यों से अवगत कराकर शीघ्र आदेश जारी करने का दबाव बनाएगा। एसोसिएशन ने इस संबंध में सचिव,राजभाषा को तमाम तथ्यों सहित एक पत्र भी सौंपा है। आशा है,हम पदोन्नति के लिए प्रतीक्षारत वरिष्ठ अनुवादकों को शीघ्र ही शुभ समाचार देने की स्थिति में होंगे।

10 comments:

  1. वरिष्ठ अनुवादकों से तदर्थ सहायक निदेशक के रूप में पदोन्नति के विचारार्थ अनुवादकों की सूची डी पी सी के लिए प्रस्तुत करते हुए , 61 पदों के अलावा , इस साल में होने वाले 6 रिटायरमेंट को भी ध्यान में लाने के प्रयास किए जाय । इस प्रकार डी पी सी 61+ 6=67 वरिष्ठ अनुवादकों के किए जाय
    Retirements:
    वरिष्ठ अनुवादकों की वरीयता सूची में क्रम सं 9,18,35,51 और
    कनिष्ठ अनुवादकों की वरीयता सूची में क्रम सं 4,16 .

    ReplyDelete
    Replies
    1. उत्तम सलाह। एसोसिएशन इस दिशा में सक्रिय है।

      Delete
  2. बहुत ही अजब गजब सूचना मिली है. राजभाषा विभाग से . जनवरी 2014 में 98 की जो लिस्ट रा.भा. विभाग ने निकाली थी उसमें से केवल 13 को पदोन्न्ति दी गई है. शेष अनुवादकों का क्या हुआ पता नहीं. और आगे क्या होगा . पता नहीं. एसोसिएशन कुछ बताए तो बेह्तर.

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी पहल

    ReplyDelete
  4. आपके प्रयास सराहनीय हैं। बहुत दुख की बात है कि संवर्ग की पुनर्संरचना के अनुमोदन के तीन वर्ष व्यतीत होने के बाद भी संवर्ग के अनुवादक और विशेष रूप से वरिष्ठ अनुवादक और तदर्थ सहायक निदेशक पदोन्नति से वंचित हैं। अनेक व्यक्ति पदोन्नति के बिना ही सेवानिवृत्त हो गए हैं। नियम है कि संवर्ग की पुनर्संरचना पर सेवा संबंधी एकबारगी छूट (one time relaxation) मिलती है, हमारे मामले में क्या यह लागू नहीं होता। आज सहायक निदेशक 5-6 साल से तदर्थ आधार पर कार्यरत हैं, अगर उन्हें नियमित करके पदोन्नत कर दिया जाए, तो सहायक निदेशक और वरिष्ठ अनुवादक के पदों पर बहुत से अनुवादकों की पदोन्नति हो सकती है।

    भर्ती नियमों को अंतिम रूप देने और इन्हें अधिसूचित कराने की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने का कष्ट करें।

    धन्यवाद।

    ReplyDelete
  5. भर्ती नियमों को अंतिम रूप देने और इन्हें अधिसूचित कराने की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने का कष्ट करें।

    ReplyDelete
  6. हमारी एसोसिएशन के सदस्य इस बात से अवश्य सह्मत होंगे कि राजभाषा से जुडे अनुवादकों के मामलों के निपटान में राजभाषा विभाग हमेशा ढीली ढाली प्रक्रिया अपनाता रहा है. अनुवादकों की नियुक्ति, पदोन्न्ति, स्थानंतरण,आदि सभी मामलों में यथासम्भव विलंब किया जाता है. फाईलों को आधी अधूरी स्थिति में दूसरे विभागों में भेज दिया जाता है इससे और अधिक देरी हो जाती है. चूंकि अनुवादक अलग अलग कर्यालयों में बिखरे होते हैं और राजभाषा विभाग से हमेशा सम्पक में रहना सम्भव नहीं होता है अत: राजभाषा विभाग लाभ की स्थिति में होता है.

    ReplyDelete
  7. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  8. वरिष्ठ हिन्दी अनुवादकों से लहायक निदेशक के पद पर पदोन्नति का मामला अब कहाँ तक पहुँचा है कृपया प्रकाश डालें जिससे हम वरिष्ठ हिन्दी अनुवादक भी अद्यतन स्थिति से अवगत हो सकें ।

    ReplyDelete
  9. Please see dept of expenditure's circular dated 29.10.2014 according to that there will be ban on creation of posts. secondly posts that have been vacant for more than one year are not to be revived except under very rare and unavoidable circumstances and that too after seeking clearance of dept of exp. In this context how OL Dept can't fill the vacant posts of ADs through UPSC and there is risk of vacant posts abolition too. Don't you think it is high time when we all ponder about it.

    ReplyDelete

अपनी पहचान सार्वजनिक कर की गई आलोचना का स्वागत है। किंतु, स्वयं छद्म रहकर दूसरों की ज़िम्मेदारी तय करने वालों की और विषयेतर टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।