*BREAKING: *राजभाषा विभाग के दिनांक 3 जुलाई,2018 के कार्यालय-ज्ञापन के संदर्भ में,2016-17 की रिक्तियों के लिए वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति का कार्य प्रगति पर; डीपीसी की बैठक अगस्त में ही संभावित। *उप-निदेशक(राजभाषा) के तौर पर पदोन्नति हेतु संयुक्त सेवावधि के प्रावधान को बहाल करने का प्रस्ताव राजभाषा विभाग के विचाराधीन। *सहायक निदेशकों को रिवर्ट किए जाने के खिलाफ दायर मामले में कैट,दिल्ली ने 22 मार्च,2018 को सुनवाई करते हुए स्थगन आदेश जारी किया। *रिवर्ट किए गए सहायक निदेशकों से रिफंड लेने का नियम नहीं।

Thursday, 5 September 2013

1986 का मामला तथा 4600 रू. ग्रेड-पे पर भावी कार्यनीति

केंद्रीय सचिवालय राजभाषा सेवा के कनिष्ठ अनुवादकों को 1986 से केंद्रीय सचिवालय सेवा के सहायकों एवं आशुलिपिकों के समान वेतन देने का मामला प्रधान पीठ,केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल,नई दिल्ली में विगत कुछ महीनों से चल रहा है। 

उल्लेखनीय है कि कनिष्ठ अनुवादक के समान वेतन पाने वाले सहायक/आशुलिपिक ग्रेड-सी को 1986 से 1640-2900 रूपए वेतनमान दिए जाने के परिणामस्वरूप उत्पन्न विसंगति/वेतन असमानता दूर करने के उद्देश्य से यह मामला कैट में एसोसिएशन द्वारा डाला गया था। इस संबंध में वर्ष 2002 में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा दिए गए फैसले के कार्यान्वयन के आलोक में सरकार द्वारा फरवरी 2003 से वास्तविक भुगतान तथा 1996 से नोशनल आधार पर वेतन निर्धारण का आदेश निकाला गया था। इस प्रकार 1996 से इस सेवा के कनिष्ठ अनुवादक वेतन के मामले में सहायक/आशुलिपिक ग्रेड-सी के बराबर हो गए थे। 

पुनः वर्ष 2006 से (छठे वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद) सरकार ने सहायक/आशुलिपिक ग्रेड-सी को 4600 रूपए का ग्रेड-पे देने का आदेश निकाला,जबकि छठे वेतन आयोग द्वारा कनिष्ठ अनुवादक और सहायक एवं आशुलिपिक ग्रेड-सी को 4200 रूपए ग्रेड-पे देने की सिफारिश की गई थी। कैट ने एसोसिएशन की ओर से दायर मामले पर विचार करते हुए सरकार को 1986 से कनिष्ठ अनुवादकों को सहायक/आशुलिपिक ग्रेड-सी के समान वेतन निर्धारित करने का फैसला सुनाया,जिसे सरकार ने नहीं माना है। 

इसी संदर्भ में यह मामला कैट में चल रहा है। एसोसिएशन की समझ इस मामले में यह है कि प्रशासनिक रूप से इस विसंगति को दूर करने की जायज मांग को मनवा पाना संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि व्यय विभाग हमारी मांग को हर हाल में नीतिगत निर्णय की आड़ में नामंज़ूर करने का मन बनाए हुए है,चाहे हम कितने भी ठोस और संगत आधार उनके समक्ष रखें। लिहाज़ा, इस मामले को न्यायालय में आगे बढ़ाकर ही सरकार पर दबाव बनाया जा सकेगा। सरकार के जितने भी तर्क हैं,जवाब हैं,उनमें सहायक के कार्य तथा अनुवादकों के कार्य की प्रकृत्ति भिन्न होने को मुख्य कारण बताया गया है,परन्तु कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि सहायक के कार्य की प्रकृति आशुलिपिक के कार्य से किस तरह मिलती है और अनुवादक के कार्य की प्रकृति किस प्रकार सहायक एवं आशुलिपिक के कार्य की प्रकृति से कमतर है। उपर्युक्त तथ्यों के मद्देनज़र, अनुवादकों को न्याय दिलाने के लिए, माननीय काउंसेल के माध्यम से एसोसिएशन न्यायालय में इन बातों को मजबूती से उजागर करने जा रहा है।

यहां हमारे कुछ अनुवादक मित्रों की चिंता का समाधान किया जाना भी आवश्यक है जिनसे एसोसिएशन द्वारा कनिष्ठ अनुवादक के लिए 4600 के ग्रेड-पे के लिए नए सिरे से नए आधार पर(टी पी लीना वाले मामले सहित) न्यायालय में वाद दायर करने के सुझाव प्राप्त हो रहे हैं। मित्रो, 1986 के मामले में अनुवादकों की सहायक के साथ पे-पैरिटी में 4600 रूपए का ग्रेड-पे निहित है। सिर्फ prospective effect को न्यायालय द्वारा सुनिश्चित करवाया जाना होगा। इस बात का उल्लेख प्रश्नगत अपील के prayer में भी है। इसी क्रम में माननीय वकील को 4600 ग्रेड-पे से जुड़े नवीनतम घटनाक्रम से भी अवगत करा दिया गया है और संगत दस्तावेज़ मुहैया करा दिए गए हैं। सुनवाई से पहले,वकील के साथ मामले के सभी पहलुओं पर विशद चर्चा भी की जाएगी। मित्रो, किसी भी नये वाद पर न्यायालय का फैसला आने में अत्यधिक समय लगता है जिससे आप सभी अवगत हैं। टी.पी. लीना वाले मामले तथा अन्य प्रकरणों को जोड़कर नया वाद दायर करते हुए शीघ्र ही 4600 का ग्रेड-पे प्राप्त करने से संबंधित निर्णय प्राप्त करने की इच्छा फिलहाल इसलिए व्यवहार्य नहीं है कि 1986 का मामला सुनवाई के अंतिम दौर में है। तर्कसंगत यही प्रतीत होता है कि हम सकारात्मक परिणाम की प्रतीक्षा करें और इसके बाद ही आगे की कार्यनीति तैयार करें। 

आशा है,उपर्युक्त ब्यौरे से,संवर्ग के उन लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान हुआ होगा जो 1986 वाले मामले अथवा कनिष्ठ अनुवादकों पर इसके प्रभाव से अवगत नहीं थे। 

पूर्व में आपसे यह सूचना साझा की गई थी कि '1986' मामले की सुनवाई 20 सितम्बर,2013 को होनी है। इसमें एसोसिएशन के पक्ष को दृढता एवं पेशेवर कुशलता से रखने के लिए वरिष्ठ वकील श्री जी. बी.गुप्ता की सेवा हाल ही में हायर की गई है जिनके नेतृत्व में ही 1986 वाले मामले में हमारे पक्ष में निर्णय आया था। उनकी फीस एवं अन्य संबंधित व्यय को पूरा करने के लिए, पूर्व पदाधिकारियों द्वारा शुरू किए गए अंशदान संग्रह के अभियान को आगे बढ़ाते हुए राजभाषा सेवा के अधिकारियों सहित सभी अनुवादकों से 1000 रूपए का सहयोग करने का अनुरोध किया गया है। सभी बंधुओँ से निवेदन है कि इस संबंध में अपना अंशदान तत्काल प्रदान करें ताकि मामले को न्यायालय में आगे बढ़ाने में आर्थिक अड़चन न आए। इसी संदर्भ में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के परिसरों के लिए अंशदान लेने का कार्य जिन पदाधिकारियों/सदस्यों को सौंपा गया है,उनका ब्यौरा संलग्न है। 

अब तक अंशदान संग्रह के कार्य में श्री कंवर सिंह(उप-निदेशक,डीओपीटी), सुश्री सुवर्चा वासुदेव(उप
-निदेशक,आर्थिक कार्य विभाग), श्री राकेश बाबू दुबे(उप-निदेशक,व्यय विभाग), श्री सत्यपाल,श्री सुभाष अवस्थी,श्री निकोलस खल्खो(सहायक निदेशक,आर्थिक कार्य विभाग), श्री के. के. मिश्रा(सहायक निदेशक,व्यय विभाग), श्री सुभाष पांडेय(सहायक निदेशक,राजस्व विभाग), श्री वे. के. श्रीवास्तव,श्री उमेश प्रसाद उदय,श्री उमाशंकर शर्मा,श्री रामबाबू त्रिपाठी, सुश्री चित्रलेखा शर्मा(सहायक निदेशक,गृह मंत्रालय),श्री अरूणेश कुलश्रेष्ठ(सहायक निदेशक,आरजीआई), श्रीमती अनुपमा परमार(सहायक निदेशक,श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय), श्री मधुकर(सहायक निदेशक,मुख्य श्रमायुक्त कार्यालय) के प्रति एसोसिएशन अत्यन्त आभारी है जिन्होंने न केवल अपने मंत्रालयों/विभागों से अंशदान-संग्रह में सहयोग दिया, बल्कि पुनः 1000 रूपए का अंशदान भी दिया। यह भी उल्लेखनीय है कि नॉर्थ ब्लॉक स्थित सभी मंत्रालयों के अनुवादकों ने भी अपने विवेक से तथा सुविधानुसार दोबारा अंशदान देकर हमारा उत्साहवर्धन किया है। एसोसिएशन श्री बृजभान( उप-निदेशक,पर्यावरण एवं वन मंत्रालय), श्री दिलीप निगम(सहायक निदेशक,सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, डॉ. महेंद्र सिंह( सहायक निदेशक, निर्वाचन आयोग), श्री बी.पी. गौड़(सहायक निदेशक,भारी उद्योग मंत्रालय),श्री डी. पी. मिश्रा(सहायक निदेशक,ऊर्वरक मंत्रालय) के प्रति भी विशेष आभारी है जिन्होंने पूर्व की भांति ज़रूरत पड़ने पर अधिक से अधिक आर्थिक एवं अन्य सहायता देने का वचन देकर एसोसिएशन का मनोबल बढ़ाया है। 

विश्वास है कि संवर्ग के अधिकारियों और अनुवादक बंधुओं से आगे भी इसी प्रकार सहयोग एवं मार्गदर्शन मिलता रहेगा।


24 comments:

  1. संपूर्ण मामले को पूरी तरह समझाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद| आगे के लिए जो कार्यवाही तय की गयी है वह उचित एवं

    नीति-संगत प्रतीत हो रही है| 1986 मामला सुनवाई के अंतिम दौर में है अतः निर्णय की प्रतीक्षा कर लेना ही उचित है किन्तु

    साथ में यह भी ध्यान रखना होगा कि कहीं इस पूरी प्रक्रिया में बहुत समय न लग जाए और इस दौरान वेतन आयोग के

    गठन की उद्घोषणा न कर दी जाए| फ़िलहाल तो ईश्वर से यही प्रार्थना करनी होगी कि 1986 मामले का निर्णय हमारे पक्ष में

    हो जिसके लिए 20 सितम्बर को पूरी तैयारी के साथ, बिना किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश रखते हुए, कोर्ट में

    उपस्थित होना होगा ताकि निर्णय किसी भी कीमत पर हमारे पक्ष में हो|

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  2. आदरणीय अध्यसक्ष महोदय
    सादर प्रणाम

    आप द्वारा उपलब्ध करवाई गई जानकारी के लिए बहुत – बहुत धन्यआवाद
    माधवी जी की चिंता बिल्कुईल जायज है आप केस पर पूरा ध्या न दे रहे हैं
    परंतु भविष्यत के बारे में अतिशीघ्र सोचें आपकी बहुत मेहरवानी होगी । जहां तक पेरेटी सहायको का सवाल है आज की डेट में अनुवादक से अनुवादक का कार्य भी अलग अलग कार्यालय में अलग –अलग प्रकार का हो सकता है । मैं तकनीकी कार्यालय में कार्यरत हूं और अनुवाद तकनीकी प्रकृति का होने से बडी कठिनाई होती है । यह इसलिए कह रहा हूं कि जैसा बाबू लोग
    कहते हें कि उन्हेंय नियमों को पढना पडता है तो अनुवादको को भी बहुत संजीदगी से कार्य की ओर ध्यागन देना पडता है । संसदीय कार्य समिति के निरीक्षण के समय तो स्थिति बहुत भीषण हो जाती है । एक शिक्षक की तरह
    हिंदी कार्यान्वउयन करना पडता है और तो और हमारे कार्यालय में ड्राफटमैन जोकि सेवा निवृति तक समस्त सेवा काल में दस पढने के बाद आईटीआई ड्राफटसमैनशिप है 4600/- ग्रेड वेतन प्राप्तक कर रहा है ट्रैडसमैन जोकि
    6500-10500 वेतनमान में थे उनका ग्रेड वेतन भी 4600/- किया गया है हमें मुख्याैकार्यालय से यह आदेश प्राप्ते हुआ है कि राजभाषा विभाग में कनिष्ठह हिंदी अनुवादक 4200/- का निधार्रित ग्रेड वेतन ले रहे हैं तो हम आपको वही ग्र्रेड वेतन प्रदान करेंगे ।
    धैर्य तो हमने रखा ही हुआ है पर उसकी भी एक सीमा होती है आज की तारीख में अनुवादक एलएलबी,
    पीएचडी, स्ना तकोतर दो-दो विषयों में हैं उनकी नियुक्ति के लिए पात्रता स्नारतक है और दूसरी ओर मेरा
    प्रशासनिक उपनिदेशक मात्र हायर सैकंडरी पास है । एक लाईन हिदी की लिख नहीं सकते व नियमों के बारे
    में जो बोल दिया ही नियम है । अनुवादकों के लिए गृह मंत्री से बात की जाए वोटों का समय आ रहा है । चार्टर आफ डिमांड उनके सामने रखा जाए क्याो अनुवादक उच्च शिक्षा प्राप्तव करके भी अपना अधिकार प्राप्तद करने में अक्षम हैं । कांग्रेस के किसी वरिष्ठो नेता से बात की जाए जो आज की तारीख में तुरंत मसला हल करवा देगा ।
    डा विजय शर्मा

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  3. छठे वेतन आयोग ने सहायक निदेशक को समूह क व 5400 देकर राजभाषा कर्मियों के वेतनमान को निश्चित ही बेहतर किया है तथा इससे राजभाषा नीति का भी भला होगा। लेकिन अनुवादकों के वेतनमान राजभाषा नीति के हक में नहीं है।
    अनुवादकों को 4600 का ग्रेड पे न दिया जाना मेरे विचार से वेतन आयोग और उस पर सरकार की स्वीकृति की अवहेलना है। आयोग द्वारा 6500 का 4200 के ग्रेड पे में संविलियन का सबसे बड़ा कारण यह था कि सरकार द्वारा आयकर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के निरीक्षकों, सचिवालय के सहायकों,आशुलिपिकों आदि का वेतनमान 5500 से 6500 कर दिए जाने से विसंगति पैदा हो गई थी तथा इस विसंगति के फलस्वरूप अनेक कोर्ट मामले भी दाखिल किए गए थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ इसका उल्लेख किया है। इस विसंगति को दूर करने के लिए ही आयोग ने 6500 का 5000 और 5500 के वेतनमान के साथ संविलियन किया था। साथ ही आयोग को यह भी अहसास था की 6500 के सभी पदों को शायद 4200 में संविलीयित करना संभव न हो, इसलिए ऐसे पदों को 6500 से स्तरोन्नयित किए जा रहे पद में संविलीयित किए जाने की भी अनुशंषा की थी। इसे ध्यान में रखते हुए छठे वेतन आयोग ने 6500 के वेतनमान की अनुशंसा बहुत सावधानी से की थी। 4200 में मर्ज हो रहे सभी पदों के लिए 6500 की अनुशंसा नहीं की गई है। मैं यहाँ विस्तार में नहीं जाना चाहता। अब वित्त मंत्रालय की हठधर्मिता देखिए, जिस विसंगति को दूर करने के लिए 6500 का वेतनमान 4200 में संविलीयित किया गया था, उस विसंगति को उसने पुनः पैदा कर दिया है वह भी भारत सरकार द्वारा आयोग की रिपोर्ट स्वीकार कर लिए जाने के बाद। यहाँ सोचने वाले बात यह है कि वित्त मंत्रालय द्वारा 4600 के पहले आदेश के भाषा बहुत सोच-समझकर रची गई है। एक तरफ यह कहता है कि जो कुछ किया जा रहा है आयोग की अनुशंसाओं के अनुसरण में किया जा रहा है तथा "as on 01.01.2006" का प्रयोग भी बहुत सोच समझकर किया गया है, दुसरी तरफ इससे जो समझा जा रहा है उससे आयोग की अनुशंसाओं की ही ऐसी की तैसी हो जाती है। आयकर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क निरीक्षक, सचिवालय के सहायक प्रभावशाली संवर्ग में आते है तथा प्रशासन में इनकी गहरी पैंठ है और इनके पास संसाधनों तथा संगठन की ताकत भी है। यही कारण है कि आयोग की रिपोर्ट और उस पर भारत सरकार की स्वीकृति को धत्ता बताते हुए इस संवर्ग को 4600 का ग्रेड पे दे दिया गया है। विशेषकर सहायकों के लिए जो तर्क दिए दिया गया है वह आयोग की अनुशंसाओं को उलट देने वाला है।

    संक्षेप में, व्यय विभाग इस शरारत का रचनाकार है, जिससे हिन्दी अनुवादकों के अलावा भी कई अन्य कर्मचारी उद्वेलित है जो इस शरारत से प्रभावित हुए है। आयोग का यह विचार था कि उसकी अनुशंसाओं को लागू किए जाने के बाद कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी तथा प्रशासन चुस्ती आएगी। लेकिन कर्मचारियों में जहां छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट और उस पर जारी अधिसूचना के फलस्वरूप जो उत्साह था, व्यय विभाग ने उस पर तुषारापात करने में कोई कसर नहीं रखी है। अंत में, मैं अपने हिन्दी अनुवादक भाइयों के प्रति पूरे सम्मान के साथ यह कहना चाहता हूँ कि 5000/5500 या 4200 के ग्रेड पे में अनुवादकों की भर्ती करना सरकार की राजभाषा नीति के प्रति सोची समझी साजिश है, ताकि लँगड़े सिपाही भर्ती कर पहले से नख-दन्त विहीन राजभाषा नीति को पंगु कर दिया जाए तथा वह लाचार होकर किसी कोने में सिसकती रहे। हममें से अधिकांश या तो बहुत भाग्यवान है या भाग्यहीन है। मुझे कोई बताए कौन मूर्ख 4200 या 4600 के वेतनमान के पदोन्नति विहीन पदों पर भर्ती होगा जिसका अँग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी पर भी प्रभुत्व होगा, विषय और संदर्भ को समझने की गहरी सूझ-बुझ होगी,कार्यशालाओं के आयोजन तथा उनमें व्याख्यान देने का माद्दा रखता हो,बैठकों और मंच संचालन की कला में माहिर हो, पत्रिकाओं में लिखने तथा उनके सम्पादन की योग्यता रखता हो, अपने अफ़सरान के भाषण लिख सकें और भी क्या-क्या, सबसे बडकर जो मानसिक रूप से इतना योग्य और सक्षम हो कि वह नख-दन्त विहीन राजभाषा नीति के प्रति 400-500 कर्म/अधि को प्रेरित करें तथा कुछ के तर्कपूर्ण शंकाओं तथा प्रश्नों का समाधान कर सकें तो अधिकांश के उलूल-जुलूल प्रश्नों तथा धारणाओं का भी जवाब दे सकें। मित्रों मेरी पूरी ताकत तो अपना उत्साह और हौसला बनाए रखने में ही खर्च हो जाती है।

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    1. बहुत खूब! अनुवादक गण की मुँह की बात छीन ली। व्यंग्य भरा सात्विक आक्रोश, प्रेरणाप्रद प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्

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  4. हरिओम प्रसाद गुप्‍ता जी ने सही विचार रखे हैं अनुवादकों को क्‍या-क्‍या करना पडता है तथा
    किस स्थिति से वह गुजर रहे हैं या सर्वविदित है मैं पहले भी कह चुका हूं कि हायर सेकंडरी
    पास उप निदेशक बन सकता है तथा अगर रिटयारमेंट की आयु न होती तो कभी का संयुक्‍त निदेशक बन जाता । पीएचडी, डिप्‍लोमा अनुवाद, हिंदी-अंगेजी एमए, बीएड, एमएससी, तथा कहीं कहीं एलएलबी पास भी हिंदी अनुवादक हैं तथा मेरे जैसे सारी उम्र हिंदी अनुवादक ही रहेंगे
    कहां की नीति है । संसदीय राजभाषा समिति कहती है कि हिंदी अनुवादक ही हिंदी कार्यान्‍यन के लिए जिम्‍मेदार है तथा एक समिति में मैंने उसे प्रताडित करते हुए भी पाया हे सो कहने का मतलब यह है कि कोर्ट का निर्णय अगर पक्ष में आ भी जाता है तो सरकार के पास आगे रास्‍ते होतो हैं सिवाए रोने के कुछ नहीं हो सकता न कभी होगा मह बलाग पर अपनी भडास निकाल लेते हैं कोर्ट केस भी क्‍या करेगा जब व्‍यय विभाग ही केस जीते हुए को रिजेक्‍ट करेगा। टीपी लीना की तरह 4600/-गेड वेतन के लिए दस-बीस कोर्ट केस कर दिए जाएं तो अवश्‍य ही सरकी हिलेगी अन्‍यथा इस केस में आज की तारीख का विकल्‍प है कि एक पचास सौ हिंदी अनुवादकों का शिष्‍टामंडल टप.पी.लीना के केस को लेकर किसी कांग्रेस के बडे अग्रणी नेता से मिले दिल्‍ली राज्‍य में वोटें पडने वाली हैं माननीय शीला दीक्षित या उनके बेटे श्री संदीप दीक्षित से लिमकर वस्‍ुतस्थिति बताई जाए तो व्‍यय विभाग के अधिकारी भी तुरंत मान जाएंगे व आदेश अवश्‍य जारी हो जाएगा । दिल्‍ली सरकार ने अपने टीचरों की रिटयारमेंट आयु सीमा 62 से 65 साल कर दी है साथ में निजी स्‍कूलों के टीचरों को भी इसका लाभ मिलेगा । इसलिए राजनीति का रास्‍ता भी अपनाया जा सकता है । सोनिया जो को भी अवगत करवाया जा सकता है ।
    डा विजय शर्मा

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  5. हरिओम प्रसाद गुप्‍ता जी ने सही विचार रखे हैं अनुवादकों को क्‍या-क्‍या करना पडता है तथा
    किस स्थिति से वह गुजर रहे हैं या सर्वविदित है मैं पहले भी कह चुका हूं कि हायर सेकंडरी
    पास उप निदेशक बन सकता है तथा अगर रिटयारमेंट की आयु न होती तो कभी का संयुक्‍त निदेशक बन जाता । पीएचडी, डिप्‍लोमा अनुवाद, हिंदी-अंगेजी एमए, बीएड, एमएससी, तथा कहीं कहीं एलएलबी पास भी हिंदी अनुवादक हैं तथा मेरे जैसे सारी उम्र हिंदी अनुवादक ही रहेंगे
    कहां की नीति है । संसदीय राजभाषा समिति कहती है कि हिंदी अनुवादक ही हिंदी कार्यान्‍यन के लिए जिम्‍मेदार है तथा एक समिति में मैंने उसे प्रताडित करते हुए भी पाया हे सो कहने का मतलब यह है कि कोर्ट का निर्णय अगर पक्ष में आ भी जाता है तो सरकार के पास आगे रास्‍ते होतो हैं सिवाए रोने के कुछ नहीं हो सकता न कभी होगा मह बलाग पर अपनी भडास निकाल लेते हैं कोर्ट केस भी क्‍या करेगा जब व्‍यय विभाग ही केस जीते हुए को रिजेक्‍ट करेगा। टीपी लीना की तरह 4600/-गेड वेतन के लिए दस-बीस कोर्ट केस कर दिए जाएं तो अवश्‍य ही सरकी हिलेगी अन्‍यथा इस केस में आज की तारीख का विकल्‍प है कि एक पचास सौ हिंदी अनुवादकों का शिष्‍टामंडल टप.पी.लीना के केस को लेकर किसी कांग्रेस के बडे अग्रणी नेता से मिले दिल्‍ली राज्‍य में वोटें पडने वाली हैं माननीय शीला दीक्षित या उनके बेटे श्री संदीप दीक्षित से लिमकर वस्‍ुतस्थिति बताई जाए तो व्‍यय विभाग के अधिकारी भी तुरंत मान जाएंगे व आदेश अवश्‍य जारी हो जाएगा । दिल्‍ली सरकार ने अपने टीचरों की रिटयारमेंट आयु सीमा 62 से 65 साल कर दी है साथ में निजी स्‍कूलों के टीचरों को भी इसका लाभ मिलेगा । इसलिए राजनीति का रास्‍ता भी अपनाया जा सकता है । सोनिया जो को भी अवगत करवाया जा सकता है ।
    डा विजय शर्मा

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  6. संवर्गीय कनिष्ठ अनुवादकों को 1986 से समान वेतन दिलवाने तथा 400 ग्रेड-पे पर भावी कार्यनीति की जानकारी साझा करने के साथ ही अनुवादकों के बारंबार निवेदन/प्रतिक्रियाओं पर भी गौर करते हुए देर से क्यों न सही वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के लिए हार्दिक धन्यवाद। बहुत दिनों की अपेक्षा/प्रतीक्षा खत्म हो गई।

    जहाँ तक 1986 केस का सवाल है, मुझे लगता है कि फैसला हमारे हक में आने पर भी 1986 से 1996 तक का ही पे-पैरिटी समस्या का समाधान होगा। फिर भी मूलभूत प्रश्न जैसे का वैसा ही रहेगा कि 2006 से 4600 ग्रेड पे लागू करने के लिए आधार क्या हैं। इसलिए, 2006 से 4600 ग्रेड-पे लागू करने के संबंध में एक अलग केस द्वारा समस्या का समाधान ढूँढना बेहतर रहेगा।

    यद्यपि, एसोसिएशन खुद आश्वस्त है कि उक्त केस से जरूर प्रयोजन की उम्मीद है तो उसके निर्णय आने तक इंतजार करना पडेगा। यदि देर है तो अंधेर होने नहीं देना ही इस वक्त की बडी माँग है। न्यायालय में तथ्यों को मजबूती से उजागर करने हेतु एसोसिएशन को शुभकामनाएँ व्यक्त करता हूँ। छोटे छोटे अंतराल में वस्तुस्थिति से अवगत कराते रहने का प्रयत्न निरंतर जारी रखने की शुभेच्छा के साथ..

    शरत्कुमार. ना. काशीकर

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  7. हिन्दी अनुवादक को 4600 ग्रेड वेतन प्रदान करने, अनुवादक को सहायक के समान मानकर समान वेतन मिलने हेतु एसोसिएशन द्वारा प्रयास जारी हैं। लेकिन जब भी यह माँग राजभाषा विभाग द्वारा वित्त मंत्रालय पहुँचती है वे इस जायज माँग को ठुकरा देते हैं। आखिर, क्या इसे सीएसोएलएस और अन्य संवर्गीय कर्मचारियों के बीच की खींचातानी या सांप-सीढी का खेल समझे?

    खैर, टी पी लीना जी के कैट केस के आदेश का अध्ययन करने के बाद निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती हैं :-

    1. एम.ए.सी.पी. के तहत वित्तीय उन्नयन(Financial upgradation) ही केस का प्रमुख मुद्दा रहा।

    2. 1/1/2006 से अनुवादक को 4600 ग्रेड पे दिए जाने के बारे में कहीं स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है।

    3. लेकिन इस तथ्य को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जिस अनुवादक 10/20 साल का सेवा काल पूर्ण करता है, यदि उस अंतराल में कोई पदोन्नति नहीं मिलती है (यह बात अलग है कि अनुवादक को पदोन्नति के अवसर नहीं के बराबर हैं!!!), तो उसको वित्तीय उन्नयन प्रदान करते समय अनुवादक पद के वेतनमान/ग्रेड पे को 1/1/2006 को 4600 मानते हुए क्रमश: 4800/5400 ग्रेड पे को प्रथम/द्वितीय वित्तीय उन्नयन के रूप में नियत/प्रदान किया जाना चाहिए। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए जो संपूर्ण तथ्य और तर्क दिए गए हैं वे अति संगत हैं।

    4. माननीय कोर्ट ने इस केस को एक ‘peculiar’ केस (अनुवादक को एम.ए.सी.पी. के तहत वित्तीय उन्नयन 4600/4800 के बदले 4800/5400 दिया जाना) माना है, इस परिप्रेक्ष्य में कि वेतनमानों का ‘मर्जर’, साथ में, मर्ज किए हुए एक वेतनमान को हिन्दी अनुवादक पद के लिए 1/1/2006 से संशोधित वेतनमान के रूप में सिफारिश करना ((वह भी काल्पनिक रूप से [notional basis] जिस के लिए ग्रेड पे में बिना बढोतरी के।)), जब भी किसी पद का वेतनमान संशोधित [5500-9000 से 6500-10500] होता है तत्संबंधी ग्रेड पे में भी बढोतरी होता है- उसका नहीं होना –आदि कारणों से इस केस को ‘पेक्यूलियर’ करार देते हुए अपने निर्णय का पुरजोर समर्थन किया है।

    5. बडी बात यह है कि माननीय कैट आदेश को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया।

    6. सामान्यतया एम.ए.सी.पी. के मामले राजभाषा विभाग/व्यय विभाग संबंधित न होकर सीधे डी.ओ.पी.टी. के दायरे में आते हैं। इस केस को ध्यान में रखते हुए डी.ओ.पी.टी. ने कोई स्पष्टीकरण दिया है (मेरे संज्ञान में तो नहीं आया है)। इसका अर्थ यह निकलता है कि डी.ओ.पी.टी. भी कैट निर्णय से सहमत है।

    7. अति मुख्य बात यह है कि टी.पी. लीना जी का विभाग/मंत्रालय कैट आदेश को माना, तदनुसार दो वित्तीय उन्नयन, वेतन नियतन और एरियर्स का भी पेमेंट कर दिया है। लीना जी ने तो जंग जीतकर उपलब्धियाँ हासिल के थीं। लेकिन कानून सभी के लिए एक समान होता है, यह हक सभी अर्ह अनुवादक को मिलना चाहिए। तात्पर्य यह है कि उक्त कैट आदेश समान रूप से सभी के लिए लागू होना चाहिए।

    यह भी पता चला है कि सेंट्रल एक्साइज कमीशनरेट के कार्यालयों में टी.पी.लीना जी के केस के पहले से ही एम.ए.सी.पी. में क्रमश: 4800/5400 का I/II वित्तीय उन्नयन दिया जा चुका है। एक-एक कार्यालय में अलग-अलग मानदंड अपनाना अनुवादक के प्रति अन्याय है।

    उपर्युक्त सारी बातों को ध्यान में रखते हुए मेरा प्रस्ताव/अपील यह है कि है टी पी लीना के कैट केस के संपूर्ण तथ्यों को अवगत कराते हुए एसोसिएशन/अनुवादक मंच को डी.ओ.पी.टी. से, जो कि एम.ए.सी.पी. के मामले में वह सक्षम प्राधिकारी है, स्पष्टीकरण मांगना चाहिए और यदि वह सहमत है, आदेश जारी करने का अनुरोध करना चाहिए। यदि यह हो जाता तो यह आधा केस जीतने के बराबर होगा जिससे अधिकांश अनुवादक तत्काल लाभान्वित हो जाएँगे। यदि एसोसिएशन से स्पष्टीकरण मांगना संभव नहीं होता है तो किसी मंत्रालय/विभाग द्वारा पूछा जा सकता है।

    एसोसिएशन/अनुवादक मंच कृपया मेरे प्रस्ताव की संभवनीयता पर तत्काल गौर करें और बात आगे बढाने पर भी विचार करें। इससे 1986 से समान वेतन से संबंधित केस पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पडेगा बल्कि अनुकूल परिणाम ही होगा।

    शरत्कुमार. ना. काशीकर

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  8. Mujhe kuchh bhawanon- shastri bhawan aur krishi bhawan - mein collection karne ka dayitwa saunpa gaya tha. collection ke dauran mujhe sukhad anubhav is bat se hua ki hamare cadre ke sabhi junior aur senior translators aur to aur hamare cadre mein abhi abhi naye aye junior translators ne pure dil se bina koi question kia anshdan mein purn sahyog kiya.Unke yogdan, sayog aur cadre ke prati samarpan ke lia mai apna hardik aabhar vyakt karta hun aur unmen apne cadre ke ujjwal bhavishya ko dekhkar harshit hun. sabhi translators ko meri taraph se hardik dhanyabad aur subhkamnayen.

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  9. मान्य अध्यक्ष महोदय, नमस्ते।

    कृपया मेरी दि.8.9.2013 की टिप्पणी देखें, जिस पर आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार है। टी.पी. लीना जी के केस/निर्णय को ध्यान में रखते हुए क्या डीओपीटी ने अनुवादकों को एमएसीपी के तहत वित्तीय उन्नयन के बारे में कोई स्पष्टीकरण दिया है? यदि नहीं दिया है तो मंच/एसोसिएशन की ओर से क्या यह स्प्ष्टीकरण मंगवाया जा सकता है कि उक्त निर्णय के अनुसार अनुवादकों को प्रथम/द्वितीय वित्तीय उन्नयन के रूप में 4800/5400 दिया जा सकता है या नहीं क्योंकि एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी को यह लाभ दिया जा चुका है (वह भी कैट, हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लडाई जीतने के बाद)और ठीक वैसे ही हर अर्हता प्राप्त अनुवादकों को यह लाभ मिलना चाहिए। यदि स्पष्टीकरण सकारात्मक होता है तो बहुत बडा अनुवादक गण जिनकी 10/20 साल की सेवावधि पूर्ण हुई हो, इसका लाभभागी बनेंगे। 1.1.2006 से 4600 ग्रेड पे मिले या न मिले, 1.9.2008 या उसके बाद से तो प्रथम/द्वितीय वित्तीय उन्नयन के रूप में 4800/5400 जरूर मिलेगा। इस लाभ को पाकर भी 1.1.2006 से 4600 ग्रेड पे संबंधी लडाई जारी रख सकते हैं। इसलिए यदि अभी तक उक्त विषय पर डीओपीटी ने स्पष्टीकरण नहीं दिया है तो कृपया इस पर तुरंत कार्रवाई करने के अनुरोध करता हूँ।

    सादर
    शरत्कुमार ना काशीकर

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    1. मै काशीकर जी से पूर्णतया सहमत हूँ. कृपया DOPT से T.P.LEENA JI के केस के आधार पर MACP से सम्बंधित स्पष्टीकरण मँगवाया जा सकता है.कृपया इस विषय पर त्वरित कार्यवाही करवाने का कष्ट करें.-माधवी

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  10. To substantiate furthre my earlier comment I am illustrating following principles adopted by the Sixth Pay Commission-

    Anomalies 1.2.19 Most of the memoranda sent precise to the Commission by Government organisations, employees or their associations highlighted various anomalies with reference to the pay scales, allowances or status. These anomalies in majority of cases were caused by upgradations of specific individual posts or grant of certain allowance by the earlier Central Pay Commissions or the Government. In some cases the upgradations had to be extended to comply with specific directions of various Courts. The Commission has taken note of these anomalies.

    2.2.19 Scales of Rs.5000-8000, Rs.5500-9000 and Rs.6500-10500 have been merged to bring parity between field offices; the secretariat; the technical posts; and the work shop staff. This was necessary to ensure that due importance is given to the levels concerned with actual delivery. It is also noted that a large number of anomalies were created due to the placement of Inspectors/equivalent posts in CBDT/CBEC and Assistants/ Personal Assistants of CSS/CSSS in the scale of Rs.6500-200-10500. The scales of Rs.5500-175-9000 and Rs.6500-200-10500, in any case, had to be merged to resolve these anomalies..

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  11. To substantiate furthre my earlier comment I am illustrating following principles adopted by the Sixth Pay Commission-

    Anomalies 1.2.19 Most of the memoranda sent precise to the Commission by Government organisations, employees or their associations highlighted various anomalies with reference to the pay scales, allowances or status. These anomalies in majority of cases were caused by upgradations of specific individual posts or grant of certain allowance by the earlier Central Pay Commissions or the Government. In some cases the upgradations had to be extended to comply with specific directions of various Courts. The Commission has taken note of these anomalies.

    2.2.19 Scales of Rs.5000-8000, Rs.5500-9000 and Rs.6500-10500 have been merged to bring parity between field offices; the secretariat; the technical posts; and the work shop staff. This was necessary to ensure that due importance is given to the levels concerned with actual delivery. It is also noted that a large number of anomalies were created due to the placement of Inspectors/equivalent posts in CBDT/CBEC and Assistants/ Personal Assistants of CSS/CSSS in the scale of Rs.6500-200-10500. The scales of Rs.5500-175-9000 and Rs.6500-200-10500, in any case, had to be merged to resolve these anomalies..

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  12. अध्‍यक्ष महोदय
    आपकी ओर से 4600/- ग्रेड वेतन के संबंध में कोई स्‍पष्‍टीकरण नहीं आया कि आजकल क्‍या कार्रवाई चल रही है अनुरोध हे कि सप्‍ताह में एक बार अवश्‍य जानकारी प्रइान करेन का कष्‍ट करें

    धन्‍यवाद
    डा विजय शर्मा

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  13. DOPT ने 19-9-2013 को एक OM जारी करके SUBORDINATE OFFICES के लिए CSOLS के समान OL कैडर के वेतनमान निर्धारित किये हैं जिसमे क. अनुवादक को 4200 ग्रेड वेतन ही प्रदान किया है.अतः अब लडाई और मुश्किल हो गयी है.क्योंकि इसे स्पष्टीकरण के तौर पर पेश किया जाएगा.यह सब पहले की गयी लापरवाहियों का परिणाम है.अब हम संभवतः लक्ष्य से बहुत दूर हो गए हैं.टी.पी .लीना की लडाई भी लगता है व्यर्थ गयी.व्यय विभाग ने अपना कार्य कर दिया.असोसिएशन कुम्भकरण की नींद सोती रह गयी बार- बार जगाने के बाद भी.-माधवी

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    1. इसमें कोई नई बात नहीं है। वेतन आयोग की सिफारिशों और दि.24.11.2008 और 27.11.2008 के ओ.एम. के हवाला देते हुए उनमें जो वेतनमान दिए गए हैं उन्हीं को दोहराया गया है। लेकिन टी पी लीना जी के केस के प्रकाश में एम.ए.सी.पी. में प्रथम/द्वितीय वित्तीय उन्नयन के रूप में 4800/5400 प्रदान किए जाने के बारे में अभी तक कोई स्पष्टीकरण डी.ओ.पे.टी. की तरफ से नहीं मिला है। वेतन आयोग का हिन्दी पद के वेतनमानों पर आशय क्या था, अब क्या होना चाहिए यह तो कोर्ट से ही हल हो सकता है।

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  14. आप की बात सही है काशीकर जी,लेकिन जो यह एक आशा थी कि १३-११-२००९ का ओ.एम.हिन्दी अनुवादकों पर भी लागू होता है.इस बात को सही ढंग से समझाया जाय तो बात बन सकती है.उसमे इस १९-९-२०१३ ने एक व्यवधान उपस्थित कर दिया है.क्योंकि latest ओ.एम. अब तक १३-११-२००९ का माना जाता था जो कि अब १९-९-२०१३ का माना जायेगा जो कि क.अनुवादकों का ग्रेड पे ४२०० होने की पुष्टि कर रहा है.अतः अब कोर्ट केस के माध्यम से और MACP के आधार पर ही अपनी मांग रखनी होगी जिसकी पुष्टि-माधवी टी.पी.लीना जी के जीते हुए केस का हवाला देकर करनी होगी.

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  15. आप की बात सही है काशीकर जी,लेकिन जो यह एक आशा थी कि १३-११-२००९ का ओ.एम.हिन्दी अनुवादकों पर भी लागू होता है.इस बात को सही ढंग से समझाया जाय तो बात बन सकती है.उसमे इस १९-९-२०१३ के ओ.एम. ने एक व्यवधान उपस्थित कर दिया है.क्योंकि latest ओ.एम. अब तक १३-११-२००९ का माना जाता था जो कि अब १९-९-२०१३ का माना जायेगा जो कि क.अनुवादकों का ग्रेड पे ४२०० होने की पुष्टि कर रहा है.अतः अब कोर्ट केस के माध्यम से और MACP के आधार पर ही अपनी मांग रखनी होगी जिसकी पुष्टि टी.पी.लीना जी के जीते हुए केस का हवाला देकर करनी होगी.

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  16. सिर्फ हम आशान्वित हैं कि 13.11.2009 का ओ.एम. अनुवादकों पर भी लागू होना चाहिए और कभी होगा…। वह कब होगा पता नहीं है। व्यय विभाग भी स्पष्ट कर दिया है कि वह हमारे लिए बिल्कुल लागू नही होता क्योंकि 31.12.2005 या उससे पहले अनुवादक पद का वेतनमान 6500-10500 नहीं था। अब इस पर तो न्यायालय से ही एक तार्किक अंत्य मिल सकता है।

    दूसरी बात, फिर मैं दोहराना चाहता हूँ कि एम.ए.सी.पी. में प्रथम वित्तीय उन्नयन 4800 ग्रेड पे में और दूसरा 5400 ग्रेड पे में देने का कोर्ट का आदेश है जिसका संबंधित विभाग ने अंतत: पालन करते हुए तदनुसार वेतन नियतन, वेतन एरियर्स सब कुछ दे चुका है। इसका मतलब हर एक अनुवादक समान लाभ (जो उसका हक है) पाने का हकदार है जो हर एक अनुवादक को मिलना चाहिए। यह तभी संभव है जब डी.ओ.पी.टी. इस संबंध में स्पष्टीकरण देता है। इसके बिना संबंधित कार्यालय तो नहीं मानते हैं। (सिर्फ टंग अडाते हैं।)

    इस समान हक के लिए टी.पी.लीना जी के केस का हवाला देते हुए फिर कोर्ट में जाने की जरूरत भी नहीं है। इस संबंध में मैंने एक कोर्ट आदेश पढा (Swamy's News Item 12 page 86) जिसका आशय यह है कि “Service benefit granted to an employee by a judiciary in a case is applicable to similarly situated other employees of a department without the other employees of the department approaching the judiciary for the same benefit." यह आदेश हमें भी पूर्ण रूप से लागू होता है। हर एक अनुवादक का विभाग चाहे अलग क्यों न हों लेकिन हम सब सी.एस.ओ.एल.एस. के वेतनमानों से ही जुडे रहने के कारण इस आदेश का आशय हमें भी समान रूप से लागू होता है।

    फिलहाल 1.1.2006 से 4600 ग्रेड पे का सपना अलग रख कर एम.ए.सी.पी.में कम से कम 1.9.2008 से 4800 बाद में 5400 पाने के बारे में सोचना चाहिए। वैसे सातवे वेतन आयोग के गठन की मंजूरी मिल ही गई है। 1.1.2006 से 4600 पाने के दिन अब बहुत दूर लग रहे हैं।

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  17. आदरणीय काशीकर जी

    अनुरोध है कि स्‍वामी न्‍यूज आईटम किस माह का है उसके बारे में बताया जाए तथा एसोशियेसन के पदाधिकारियों से भी अनुरोध है कि वर्तमान स्थिति की जा रही कार्रवाई के बारे में तुरंत अवगत करवाएं बडी मेहरवानी होगी । कुछ किया जा सकता है तो एक मात्र रास्‍ता व्‍यय विभाग वे राजनेताओं के द्वारा ही 4600 ग्रेड वेतन का हो सकता है

    डा विजय शर्मा

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  18. कृपया इसे ऐसे पढा जाए "Swamy's News - January, 2013 and Item 12 at page 86".
    असुविधा के लिए खेद है।

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  19. कृपया इसे ऐसे पढा जाए "Swamy's News - January, 2013 and Item 12 at page 86".
    असुविधा के लिए खेद है।

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  20. अध्‍यक्ष महोदय

    एसोशियेसन के पदाधिकारियों से अनुरोध है कि वर्तमान स्थिति तथा की जा रही कार्रवाई के बारे में तुरंत अवगत करवाएं बडी मेहरवानी होगी । कुछ किया जा सकता है तो एक मात्र रास्‍ता व्‍यय विभाग वे राजनेताओं के द्वारा ही 4600 ग्रेड वेतन का हो सकता है
    धन्‍यवाद
    डा विजय शर्मा

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  21. अध्‍यक्ष महोदय

    एसोशियेसन के पदाधिकारियों से अनुरोध है कि वर्तमान स्थिति तथा की जा रही कार्रवाई के बारे में तुरंत अवगत करवाएं बडी मेहरवानी होगी । कुछ किया जा सकता है तो एक मात्र रास्‍ता व्‍यय विभाग वे राजनेताओं के द्वारा ही 4600 ग्रेड वेतन का हो सकता है
    धन्‍यवाद
    डा विजय शर्मा

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