*BREAKING:*2017-18 और 2018 की रिक्तियों के एवज में वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के लिए एपीएआर और शास्तियों के साथ सतर्कता निकासी प्रमाणपत्र भेजना भी ज़रुरी *दिसम्बर,2018 में विभागीय पदोन्नति समिति की एक और बैठक के प्रयास ज़ोरों पर *उप-निदेशक(राजभाषा) के तौर पर पदोन्नति हेतु संयुक्त सेवावधि के प्रावधान को बहाल करने के लिए भर्ती नियमों में आशोधन की फाइल डीओपीटी को भेजे जाने की ख़बर *कनिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के आदेश जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में *एसोसिएशन ने कनिष्ठ अनुवादकों के लिए 4600/-रु. के ग्रेड-पे की मांग को लेकर अदालत जाने का निर्णय लिया;सभी संबंधितों से संगत दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का आग्रह।

Monday, 23 September 2013

कैट में सुनवाई की तारीख 13 नवम्बर निर्धारित

जैसा कि पूर्व में सूचित किया गया था,सहायकों के साथ कनिष्ठ अनुवादकों की पैरिटी से जुड़े 1986 वाले मामले की कैट में सुनवाई 20 सितम्बर,2013 को निर्धारित की गई थी। 20 सितम्बर को यह सुनवाई नहीं हो सकी और सुनवाई की अगली तारीख़ 13 नवम्बर,2013 निर्धारित की गई है।

5 comments:

  1. महोदय,

    इस संदर्भ में पुन: सविनय अनुरोध करता हूं कि कोर्ट केस से यह समस्‍या हल नहीं होगी सरकार के पास हिंदी अनुवादकों को दबाने के लिए बहुत से हथि‍यार हैं अत: राजनेताओं से एसोशियेशन के संपर्क के बाद ही संबंधित विभाग उचित कार्राई कर सकता है ।

    सादर सहित
    डा विजय शर्मा

    ReplyDelete
  2. महोदय,

    इस संदर्भ में पुन: सविनय अनुरोध करता हूं कि कोर्ट केस से यह समस्‍या हल नहीं होगी सरकार के पास हिंदी अनुवादकों को दबाने के लिए बहुत से हथि‍यार हैं अत: राजनेताओं से एसोशियेशन के संपर्क के बाद ही संबंधित विभाग उचित कार्राई कर सकता है ।

    सादर सहित
    डा विजय शर्मा

    ReplyDelete
  3. उपर्युक्‍त कथन से मैं सहमत हूं । प्राय: देखा जाता है कि कैट एवं उच्‍चतम न्‍यायालय से निर्णय मिलने के बाद भी इसकी उपेक्षा कर दी जाती है । ऐसे मामलों में हमें राजनेताओं तथा उससे संबंधित अधिकारी से हमारा संपर्क या सिफारिश नहीं होती तब तक इस पर गौर नहीं किया जा सकता है । इसलिए हम अधिकारी से अनुरोध है कि न्‍यायालय के निर्णय के पहले इस मामले में मंत्रालय से एप्रोच एवं सिफारिशकी जानी चाहिए ।

    ReplyDelete
  4. उपर्युक्‍त कथन से मैं सहमत हूं । प्राय: देखा जाता है कि कैट एवं उच्‍चतम न्‍यायालय से निर्णय मिलने के बाद भी इसकी उपेक्षा कर दी जाती है । ऐसे मामलों में हमें राजनेताओं तथा उससे संबंधित अधिकारी से हमारा संपर्क या सिफारिश नहीं होती तब तक इस पर गौर नहीं किया जा सकता है । इसलिए हम अधिकारी से अनुरोध है कि न्‍यायालय के निर्णय के पहले इस मामले में मंत्रालय से एप्रोच एवं सिफारिशकी जानी चाहिए ।

    ReplyDelete
  5. उपर्युक्‍त कथन से मैं सहमत हूं । इस मामले में हमें मंत्रालय एवं उच्‍चप्राधिकारियों की सिफारिश एवं एप्रोच लगाना चाहिए । अन्‍यथा केस जीत कर भी कुछ हासिल नहीं कर पायेंग ।

    ReplyDelete

अपनी पहचान सार्वजनिक कर की गई आलोचना का स्वागत है। किंतु, स्वयं छद्म रहकर दूसरों की ज़िम्मेदारी तय करने वालों की और विषयेतर टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।