*BREAKING:*2017-18 और 2018 की रिक्तियों के एवज में वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के लिए एपीएआर और शास्तियों के साथ सतर्कता निकासी प्रमाणपत्र भेजना भी ज़रुरी *दिसम्बर,2018 में विभागीय पदोन्नति समिति की एक और बैठक के प्रयास ज़ोरों पर *उप-निदेशक(राजभाषा) के तौर पर पदोन्नति हेतु संयुक्त सेवावधि के प्रावधान को बहाल करने के लिए भर्ती नियमों में आशोधन की फाइल डीओपीटी को भेजे जाने की ख़बर *कनिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति के आदेश जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में *एसोसिएशन ने कनिष्ठ अनुवादकों के लिए 4600/-रु. के ग्रेड-पे की मांग को लेकर अदालत जाने का निर्णय लिया;सभी संबंधितों से संगत दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का आग्रह।

Friday, 26 July 2013

काम रूका नहीं,जारी है दोस्तो......

Dear friends,

The Association conveys its greetings to all brothers and sisters in Central Sectt. Official Language Service on completion of one year since the new body came into existence (17.07.2012). We also express our thanks to all of you for reposing faith in and expressing solidarity with us. Needless to say, your co-operation and continued support will further strengthen and enliven us to work with vigour and courage for the improvement in and upliftment of the cadre as a whole.

Having felt the need to have an authentic, instant and essential medium of communication for enabling the members to have knowledge of activities being carried  out by the Association, we, the Executive Body, have decided  to introduce this blog on which members are invited to give their feedback and suggestions. We will try to ensure that information/updates on the issues taken up by us with the authorities concerned at appropriate level are passed on to our esteemed members in a prompt, reasonable, reliable and responsible manner through this blog without encroaching upon the space created for any of us (Deptt. or Association). Absence of any update on the issues so far concerning the cadre can be attributed to inter-se encroachment of defined space of the office bearers.
The Association has actively been pursuing the matters continuously with the departments concerned and the status on the various issues concerning the cadre is as follows :-

(1)   Granting Grade Pay of Rs. 4600/- to Junior Hindi Translators-
The matter having been represented by the Association and initially rejected by Deptt. of Expenditure, it has once again been referred to Deptt. of   Expenditure for  examination after this Association's rigorous persuasion.

(2)   Notifying Recruitment Rules –
The issue has been prioritized after meeting of the Association with JS(OL) in the 2nd week of July and consequently a meeting at the level of Joint Secy. (OL and  DOPT) has been held last week. The issue is expected to be cleared in a couple of days in DOPT.

(3)   Court case –
Next date for hearing in CAT has been fixed for 19th of August, 2013. A senior counsel has been engaged for a speedy and favourable decision.

(4)   Promotion to various posts-
The process of filling up the existing vacancies for the various posts by promotion & regularization is underway. The Association is committed to get the due delivered to the eligible Ad-hoc ADs and senior most translators.

Hoping for your continuous cooperation and support as ever.

39 comments:

  1. nice to have a blog free from all encumbrances.All the best!!

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  2. Thanks.wish you all success in your endeavor.

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  3. मुझे न राजनीति में रूचि है और न किसी गुट विशेष में और न ही मुझे राजनीति आती है । पिछले संवर्ग के चुनाव में एक आशा बंधी थी कि कुछ न कुछ तो सही होगा क्‍योंकि इन पदाधिकारियों में से कुछ के साथ में काम कर चुका था और कुछ के साथ मेरे काफी मित्रवत और घरेलू जैसे संबंध थे लेकिन पुनगर्ठन के तीन साल व्‍यतीत हो जाने के बाद कुछेक जुनियर सिर्फ नियमित वरिष्‍ठ हो गए जबकि इनमें से ज्‍यादातर को पहले ही एमएसीपी मिल चुकी थी जबकि विटामन एम जस की तस रही अर्थात किसी को कोई खास वित्‍तीय लाभ नहीं हुआ । सैकडों पद रिक्‍त होने के बावजूद यह पहली वार है कि पूरा संवर्ग और तथाकथित एशोसिएशन (नों) हाथ पर हाथ धरे हुए है । लगता........ नहीं .......हम जीती हुई बाजी हारते हुए जा रहे हैं । साहिब, बीबी और गुलाम

    मुझे अब तक यह समझ में नहीं आया है कि आखिर चल क्‍या रहा है । पिछले 13 साल से, मैंने इस संवर्ग के कई मठ और मठाधीशों को देखा है और घुमा-फिराकर अथवा कुल मिलाकर कहा जाए तो ढ़ाक के तीन पात ।

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  4. Its really nice to hear such good news after a long time. Many congratulations to you and all the best for the future.

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  5. thanks for the update

    sunil kaushal

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  6. Can u please tell us on what ground the representation regarding 4600gp to jr. translators has been rejected by Department of Expenditure? Honourable Supreme Court has given decision in its favour and even the first citizen of India i.e. President of India follows Supreme Court's Decision.How can Ministry of Finance/Deptt. of Expenditure deny it. It seems that the matter has not been pursued whole heartedly.That's why the authorities have also not taken it seriously and rejected it .Please hurry up & pursue the matter quickly, as once the Pay Commission is declared we will have only to cry over spilt milk,which we have to avoid at any cost.

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  7. इस मामले के वित्‍त मंत्रालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद एसोसिएसन की भूमिका सबके सामने है और बहुत दुख की बात है कि अभी तक एसोसिएशन किसी रणनीति के साथ सामने नहीं आ रही है. एक एक दिन कीमती है. आपसे पहले भी निवेदन किया है यहां एक बार पुन: विनम्र आग्रह है कि तत्‍काल अनुवादकों से उन तथ्‍यों को पूरी तरह साझा किया जाए जिनके आधार पर एसोसिएशन का प्रस्‍ताव खारिज किया गया था. इसमें क्‍या परेशानी है. यह कोई गोपनीय दस्‍तावेज नहीं है...सभी अनुवादकों को यह जानना आवश्‍यक है. और हां, यदि एसोसिएशन यह जानकारी साझा करने में असमर्थ हो तो तत्‍काल सूचित करे.. धन्‍यवाद

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  8. Kirpya association 4600/- mamle main puri jankari uplabdh karayen tatha nirast hone ka karan bhi batayen.

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  9. Kripya association 4600 mamle ki puri jankari uplabdh karaye tatha nirast hone ka karan bhi batayen.

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  10. कृपया शीघ्र से शीघ्र हम हमें बताने का कष्ट करें िक 4600 ग्रेड वेतन को किस आधार पर रिजेक्ट किया गया है.ताकि हम आगामी कार्यवाही पर विचार कर सकें --.सधन्यवाद

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  11. आदरणीय आर्य जी एवं माधवी जी ने सही प्रश्‍न पुछा है कि 4600/- ग्रेड वेतन किस आधार
    पर रिजेक्‍ट किया गया है वित मंत्रालय ने क्‍या सुर्पीमकोर्ट का निर्णय नहीं पढा कि जैसे कि बाबू लोगों
    कह यह नियत होती है कि हर एक केस में जिस मे उनका कोई हित नहीं होता उसे रिजेक्‍ट किया जाए । अन्‍यथा ऐसी कोई प्रथा नहीं की माननीय न्‍यायालय को भी न माना जाए यह तो अवमानना का केस है और इतनी प्रभावशाली ऐसोसियेशन जिसके साथ सचिव राजभाषा महोदया भी उनके साथ हैं क्‍यों नहीं कुछ कर पाई । आदरणीय आर्य जी एवं अन्‍य साथियों को साथ लेकर चलें ताकि अनुवादक भाईयों का कुछ न कुछ भला हो ।

    डा विजय शर्मा

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  12. प्रिय बंधु वित विभाग को यह समझाने का कष्‍ट करें कि अगर 4600/- का ग्रेड वेतन वह नहीं
    प्रदान कर सकते तो असंख्‍य कोर्ट के लिए सरकार तैयार रहे । जिससे उन्‍हें असंमजता की स्थिति का सामना करना पडेगा । हमारे विभाग में ड्राफटसमैन व ट्रेडसमैन जोकि 1.1.2006 को 6500-10500 के वेतनमान में कार्यरत थे उन्‍हें तत्‍काल प्रभाव से 4600/- ग्रेड वेतन प्रदान कर दिया गया था कनिष्‍ठ अनुवादकों का इसलिए रोका गया कि राजभाषा विभाग ने 4200/- का ग्रेड वेतन प्रदान किया है जब वह इसे 4600/- करेंगे तब हम भी ऐसा कर देंगे । परंतु खेद का विषय है कि किसी ने भी इस सर्दभ में कुछ नहीं किया मुझे अनुवादक संघ से अपेक्षा थी कि यह ऐसा केस है जो कि समय लेगा पर कार्य अवश्‍य होगा देखते हैं इस केस को कैसे हेंडल किया जाता है । मंत्री महोदय से इस संबंध में बातचीत करनी चाहिए व अन्‍याय सहन न किया जाए ।
    डाक्‍टर विजय शर्मा

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  13. कृपया शीघ्र से शीघ्र हम हमें बताने का कष्ट करें िक 4600 ग्रेड वेतन को किस आधार पर रिजेक्ट किया गया है.ताकि हम आगामी कार्यवाही पर विचार कर सकें --.सधन्यवाद
    यह भी देखें कि किन किन विभागों के द्वारा 4600/- ग्रेड वेतन प्रदान कर दिया गया है ।
    मेरे
    हिसाब से राजभाषा विभाग को ही 4600/- ग्रेड वेतन देने की कार्रवाई करनी चाहिए ।

    डाक्‍टर विजय शर्मा

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  14. इस मामले के वित्‍त मंत्रालय द्वारा खारिज किए जाने के कारण और एसोसिएशन की रणनीति क्या हैं इन विषयों/तथ्‍यों को पूरी तरह साझा किया जाए। इस हालत में यह भी शीघ्रता से सूचित करें कि प्रत्येक अनुवादक को अपने स्तर पर क्या कदम उठाने चाहिए। देर न हो जाए। हम जीती हुई बाजी न हारे।

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  15. आदरणीय आर्य जी , काशीकर व माधवी जी के द्वारा विचारों पर तुरंत ध्‍यान दें तथा मतभेद भुलाकर तुरंत कार्राई करें किसी वरिष्‍ठतम कील से परामर्श करें मेरे हिसाब से आप सभी सबसे शिक्षित कर्मचारी हैं । हायर सेंकंडरी । मैट्रिक पास सयुक्‍त निदेशक तक का पद पा चुकें हैं किस प्रकार की परेशानी में आप घुम रहे हैं । कानूनी कार्रवाई करें । अन्‍यथा अधिकारियों राजभाषा विभाग/ व्‍यय विभाग में तुरंत संपर्क करें । घबराने की आवश्‍यकता नहीं । स्‍पष्‍ट केस को कैसे फेल किया जा रहा है । जब 6500-10500 के ट्रेडसमैन /ड्राफटसमैन 4600/- का गे्रड वेतन ले सकते हैं । अनुवादक सुर्पीमकोर्ट में केस जीत जाती है तो उन्‍हें क्‍या दिक्‍कत है आदेश जारी करने में । मंत्री / सचिव राजभाषा से भी तुरंत संपर्क करें ऐयस मेरा अनुरोध है । तवरित कार्रवाई की अपेक्षा में । अन्‍यथा हाथ खडे करें और तुरंत अनुवादक भाईयों को सूचित करें कि अब क्‍या किया जाए ताकि संदेहास्‍पद स्थिति न बन सके । मेलजोल की अपेक्षा के साथ पुन:
    डा विजय शर्मा

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  16. आदरणीय महोदय
    अभी अभी पता चला कि व्‍यय विभाग ने बिना कोई कारण तथा सुर्पीमकोर्ट के निर्णय को
    ध्‍यान मे न रखते हुए केस को रिजेक्‍ट किया है पहले क्‍या ग्रेड थे इससे उन्‍हें क्‍या लेना देना
    बात 1.1.2006 की 6500-10500 की है उन्‍हें क्‍या किसी न समझाया नहीं । पुन: अनुराध है
    कि व्‍यय विभाग से तुरंत संर्पक करें मेरे ख्‍याल में वह व्‍यर्थ है । कैट से आदेश जारी करवाएं
    जोकि तुरंत हो जाएंगे । फिर देखना यह रिजेक्‍ट करनेवाले अधिकारी कहां जाएंगे । अन्‍यथा कोई लाभ नहीं । अगर अनुवादक अपने हित की लडाई नहीं लड सके तो क्‍या लाभ किसी और से क्‍या अपेक्षा है । धन्‍य है झांसी की रानी की तरह लडने वाली टी.पी.लीना जिसने धैर्य रखा व सुर्पीमकोर्ट तक विजय हुई । हमें आशुलिपिक, सहायकों के कैडर से कोई मतलब नहीं । मेरा आपसे अंतिम बार अनुरोध है कि अच्‍छे वकील से संपर्क करें तुरंत संघ विजयी होगा । संघ से बहुत सी अपेक्षाएं थीं परंतु शायद यह उतना प्रभावकारी नहीं रहा पनु: अनुरोध है कि सभी मिलकर चलें और तभी विजयी होंगे । अन्‍यथा बलाग पर लिखने का कोई लाभ नहीं ।
    अपेक्षा सहित
    सादर सहित

    डा विजय शर्मा

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  17. काम रूका नहीं,जारी है दोस्तो.....Granting Grade Pay of Rs. 4600/- to Junior Hindi Translators-

    काम अभी रुका है, दोस्‍तो 4600/- ग्रड वेतन संबंध तत्‍काल कार्रवाई अपेक्षित है । अपने
    साथियों को साथ लेकर चलो तथा बिना रुके तुरंत कार्रवाई की जाए । वकील के माध्‍यम से
    कैट
    से आदेश पारति करवाएं । व्‍यय विभाग में निजी तौर पर मिलें । व्‍यय विभाग के हिंदी अनुवादकों । राजभाषा विभाग के हिंदी अनुवादकों को साथद लेकर अधिकारियों से संपर्क करें । टी पी लीना के कसे को समझाएं नहीं तो 1986 जैसे केस की तरह की कार्य होगा । पढलिखकर
    शिक्षिति वर्ग होकर भी किसके भरोसे बैठे हैं । साथ में क्‍या कार्रवाई चल रही है पारदिर्शता रखें ।
    त्‍यागपत्र दिए पदाधिकारियों से मिलकर व्‍यूह रचना बनाएं । हमने कोई जमीन का बंटवारा नहीं करना । सीध तौर पर अनुवादक भाईयों को सूचना दी जाए । एक सप्‍ताह तक समस्‍त जानकारी देकर अनुवादकों को निर्देश दें । जीती ही बाजी को हारने न दें । पुन: विजयी होने के आग्रह के साथ तवरित कार्रवाई की अपेक्षा में । सादर सहित
    आपका सादर सहित
    डा विजय शर्मा

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  18. आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय,

    टी पी लीना जी ने कहीं लिखा है कि कोर्ट में केस डाला जाए क्‍योंकि उच्‍चतम न्‍यायालय
    ने पहले ही 4600/- गेड वेतन के पक्ष में निर्णय दिया हुआ है । अन्‍यथा व्‍यय विभाग का नियम ही उत्‍तर बन जाएगा तथा सातवें वेतन आयोग में अनुवादकों के लिए आगे कुछ नहीं बचेगा । अत: पुन : सविनय अनुरोध करता हूं की एसोशियेशन की बैठक बुलाएं एक निर्णय लें । पदाधिकारियों की डियूटी लगाएं । इस कार्य में मरा बार-बार अनुरोध है कि किसी प्रकार की देरी हमारे लिए घातक सिद्ध होगी क्‍योंकि चुनावी मौसम आ रहे हैं सरकार की ओर से लुभवनी घोषणाओं की अपेक्षा है । अंत में पुन: अनुरोध है कि तवरित कार्रवाई इसी सप्‍ताह बुलाएं चुने हुए पदाधिकारिी जिसमें त्‍यागपत्र दिए हुए हैं को शामिल करें त्‍यागपत्र वासप लेना का उन्‍हें अनुरोध करें । हमारा ध्‍येय केवल अनुवादकों के हितों की रक्षा करना है । कोई और बाहर से नहीं आएगा हमें ग्रेड वेतन देने । यह कार्य मिल बैठकर ही हो सकता है कि कैसे रणनीति बनाई जाए । घर में रह कर भी बच्‍चों माता पिता-भाई बहन से तकरार होती रहती है । अनुवादक ऐसाशियेशन भी एक परिवार है । अत: मिल कर चलें । बैठक करें । तुरंत कार्रवाई की जाए ।
    सादर सहित

    डा विजय शर्मा

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  19. एक गैर सीएसओएलएस अनुवादक होकर, सदस्य न होते हुए, इस ब्लॉग में एसोसिएशन की गतिविधियों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना शायद समुचित नहीं है, परंतु, संवर्गीय अनुवादकों के वेतनमान से हमारे वेतनमान/नियतन भी जुडे होने के कारण यदि मैं अपना विचार व्यक्त करता हूँ तो यह अनुचित भी नहीं होगा।

    यह अत्यंत दुखद स्थिति है कि ग्रेड पे 4600 का सारा वृत्तांत दूसरे ब्लॉग से मालूम करना पडता है जिसके बारे में अभी तक इस ब्लॉग में कुछ भी सूचना नहीं दी गई है।
    इससे यह विदित होता है कि एसोसिएशन अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं कर रही है और अनुवादकों के हित की रक्षा करने में भी वह असफल दिख रही है। अनुवादकों से गठित एसोसिएशन, अनुवादकों से चुने हुए उसके पदाधिकारी गण अनुवादकों की भलाई के लिए यदि काम नहीं करेगा तो उसका औचित्य ही क्या है। अप्रेल 13 में ही प्रतिवेदन को व्यय विभाग द्वारा ठुकराए जाने के तीन महीने बाद भी उस पर कोई कदम नहीं उठाना, अपने ही अनुवादक सदस्यों को गंभीर हालत से अवगत न कराते हुए उनको अंधेरे में रखना, यहाँ तक कि उनके प्रातिनिधिक पदाधिकारियों को ही त्याग-पत्र देने तक मजबूर करना - ये सभी यह इंगित करता है कि एसोसिएशन में कुछ भी ठीक नहीं है। यदि एसोसिएशन को लगता है कि अनुवादकों की निरीक्षा के अनुरूप काम करना संभव नहीं है तो पदाधिकारी अपने पद को स्वसंतोष से त्याग कर सुयोग्य, सक्रिय एवं सम्यक रूप से जिम्मेदारी का निर्वहण करनेवालों के लिए मार्ग प्रशस्त करना बेहतर होता है। एसोसिएशन के अपील पर अनुवादक वर्ग इस मामले में अपने स्तर पर कोई कार्रवाई न करते हुए एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे कदम पर विश्वास करके आशान्वित बैठा है लेकिन उसके अनुरूप कोई काम अब तक नहीं हुए हैं। कृपया एसोसिएशन के समस्त पदाधिकारी इस पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। स्नातक/स्नातकोत्तर या उससे अधिक उपाधि के साथ सुशोभित अनुवादक वर्ग की इस हालत पर, बेबसी पर क्या कहें?

    ग्रेड पे 4600 प्रदान करने के मामले में यह पता नहीं चला कि व्यय विभाग द्वारा अनुवादक-सहायक प्रैरिटी असंभव कहकर 4600 नहीं दिए जा सकने की बात दोहराते हुए इस मामले को पहले ही खारिज करके आदेश भी जारी हो जाने के बाद भी उसी कारण देते हुए ग्रेड पे का अनुरोध कैसे किया गया?

    प्रतिवेदन देते समय तो यह बात बिलकुल स्प्ष्ट हो चुकी थी कि यदि ग्रेड पे 4600 के लिए लडने के लिए एक मात्र सहारा श्रीमती टी पी लीना जी के कोर्ट का आदेश है। विदित है कि प्रतिवेदन में भी इस तथ्य को ठीक तरीके से प्रतिपादित किया गया था। अभी व्यय विभाग से मिली टिप्पणी में इसकी कोई जिक्र नहीं है तो लापरवाही कहाँ हुई है?

    फिलहाल,मेरी सीमित बुद्धिशक्ति के अनुसार, यह कदम उठाना बेहद जरूरी लगता है कि "अंतिम प्रयत्न के रूप में" एक प्रतिनिधि मंडल (जिसमें एसोसिएशन के पदाधिकारी और गैर पदाधिकारी/ विशेषज्ञ भी शामिल हों जो इस मसले के आदि-अंत को जानते हैं ताकि इस मामले को पूरी ताकत के साथ प्रस्तुत किया ज सके) पूरी तैयारी के साथ सारे दस्तावेज सहित राजभाषा विभाग, जरूरत पडने पर व्यय विभाग, के उच्च स्तरीय अधिकारियों से भेंट करके मुख्य रूप से उपर्युक्त कैट केस का सदाशय और आदेश के बारे में उनको समझाना चाहिए साथ में यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यह सहायकों से पैरिटि से कतई संबंधित नहीं है। और, 24/27.11.08 तथा 13.09.09 को जारी आदेशों के इंटरप्रिटेशन में जो तकनीकी समस्यायें हैं जिसका समाधान/स्पष्टीकरण माननीय कोर्ट ने आदेश के रूप में दिए हैं, उसे स्पष्ट करना चाहिए। इसके अलावा अन्य विषय जैसे, अत्यंत विरल पदोन्नति के अवसर, अनुवादकों को अनुवाद के अलावा दिए जा रहे अन्य कार्य, अनुवादकों की नियुक्ति के लिए सहायकों से ज्यादा अनिवार्य शैक्षिक अर्हता की आवश्यकता आदि से भी अवगत कराकर 4600 ग्रेड पे प्रदान किए जाने पर सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने के लिए अनुरोध किया जा सकता है। यदि इसका सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली तो ठीक है नहीं तो अंततोगत्वा अदालत का दरवाजा खटखटाना ही हमारी मजबूरी होगी। हाथ पर हाथ धरे बैठने से कुछ हासिल नहीं होगा। जो भी करना है बिना समय गंवाए अति शीघ्रता से करना है। इस संबंध में प्राथमिकता देते हुए एसोसिएशन् पूरी ताकत लगाकर गोल हासिल करने का विनम्र अनुरोध करता हूँ।

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  20. आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय
    आपका बलाग पर मेरी जिज्ञासाओं के प्रकाशन के लिए कोटि-कोटि धन्‍यवाद । मेरा आपसे
    पुन : अनुरोध है कि आपातकालीन बैठक सोम या मंगलवार को बुलाई जाए । इसमें 4600/-
    गेड वेतन के मुददे पर पनु: चर्चा करें व समाधन निकालने का प्रयास करें । जिस तरह बलाग पर तवरित प्रकाशन हो रहा है ऐसे ही उत्‍तर दें तथा संभावित कार्रवाई करें । अन्‍य साथियों को साथ लेकर चलें । अगर आप यह कार्य यानि क‍ि 4600/- ग्रेड वेतन का अतिशीघ्र करवा दें तो मैं आपका सदैव ऋणि रहूंगा एव अन्‍य साथी भी सदैव आपका गुणगान करेंगे क्‍योंकि यह केस सुप्रीमकोर्ट के द्वारा अनुमोदति है तो व्‍यय विभाग इसमें रोडा नहीं अटका सकता । व्‍यय विभाग के पास पनु: इस केस को भेजने से समय नष्‍ट होगा क्‍योंकि बाबू लोगों का आप को पता ही है कि अनुवादकों के वह कितने पक्षधर हैं । पनु: अनुरोध है कि तवरित कार्रवाई की जाए ।
    सादर सहित
    आपका
    डा विजय शर्मा

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  21. Respected Chairman Sir,

    I assumed that we have lost the episode of 4600/- grade pay case due
    to negative behavior of DoExp. and non properly submission of representation and lukewarm behavior of DOL aslo so what they expect from us. You can inquire form the all GOI offices that JHT do duel work at their offices and promotion are being given to Assistant and other staff what is the miserable situation of JHT . Who will looks in these aspects .GOd knows.

    Dr. Vijay Sharma

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  22. आदरणीय अध्‍यक्ष श्री दिनेश सिंह जी

    सादर नमस्‍कार
    मेरा आपसे 4600/- ग्रेड वेतन के संबंध में अंतिम बार अनुरोध है कि तुरंत कार्रवाई करें तथा
    व्‍यय विभाग के बाबू लोगों पर विश्‍वास न करें तो अच्‍छा है । किसी सही वकील के साथ परामर्श करें अपने अन्‍य साथियों को साथ लकेर तुरंत केट में जाएं । हम अपनी ओर से भरपूर प्रयास करेंगे । यह केस हम न जीत सके तो समझो कभी भी हम विजयी नहीं होगें तथा एसोशियेशन का नाम भी नाममात्र का रह जाएगा । जो केस पहले रिजेक्‍ट किया गया है तथा अन्‍य कोई तथ्‍य नहीं साथ में लगाए गए बिना किसी कारण पुरानी बातों को ध्‍यान में रख कर ही केस रिजेक्‍ट हुआ है । टी पी लीना का केस देखा नहीं गया ।

    डा विजय शर्मा

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  23. आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय

    आपसे अनुरोध है कि ग्रेड वेतन के बारे में नवीनतम जानकारी के बारे में सभी के साथ बात तुरंत सांझा की जाए कि आगामी कार्रवाई क्‍या की जा रही है । अपेक्षा है कि मेरे बारंबार अनुरोध पर आप अवश्‍यक ध्‍यान देंगे । एक बात कहना चाहता हूं जो पेड फलदार होता है वह झुका हुआ होता है अत: अध्‍यक्ष होने के कारण आपकी जिम्‍मेवादी बनती है कि सभी की आवाज सुनी जाए सौह्रार्द पूर्ण वातारण में सभी को साथ लेकर उनकी राय लेकर इस केस में तवरित कार्रवाई की जाए । एक- एक पल कीमती है । व्‍यय विभाग से अपेक्षा न रखें ।

    सादर सहित
    डा विजय शर्मा

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  24. दि.24 या 25 को मैने एक प्रतिक्रिया प्रकट करने हेतु पोस्ट किया था जो अभी तक प्रकट नहीं हुआ है। शायद एसोसिएशन को उसका आशय कडवा लगा होगा। मेरी प्रतिक्रिया कडवी जरूर थी लेकिन आपत्तिजनक तो कतई नहीं थी जिसे प्रकट न किया जा सके। मेरा मानना है कि सच कडवा होता है मगर उसका सामना करने से व्यक्ति/संस्था का अंतस्स्त्व बढता है। समस्त पदाधिकारी अत्यंत सुशिक्षित और अनुभवी हैं। 4600 ग्रेड पे के मामले में क्या प्रगति हुई है,इसके बारे में विस्तृत रूपसे अवगत कराने की कृपा करें।

    अभी भी मेरा उपर्युक्त प्रतिक्रिया का प्रकट होने का इंतजार है और हमारे आतंकों का समाधान भी एसोसिएशन की ओर से मिलेगा।

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  25. आदरणीय लाअध्‍यक्ष महोदय


    क्‍योंकि केस अनुवादक ने जीता है और इस संदर्भ में गल्‍त स्‍पष्‍टीकरण व्‍यय विभाग ने दिया है
    तथा मेरे हिसाब से फालोअप में कमी के कारण व व्‍यय विभाग के बाबूमंडल के अडियल रवैये के कारण ग्रेडवेतन का कार्य सम्‍पन्‍न नहीं हो सका । इसे अभी भी सुलझाया जा सकता है । ऐसी मेरी आशा है । जब तक कार्य सम्‍पन्‍न नहीं होगा तब तक हम आपसे अनुरोध करते रहेंगे व पूरा सहयोग भी करेंगे ।
    वरिष्‍ठ अनुवादक भी इससे लाभ प्राप्‍त करेंगे ।


    सादर सहित
    डा विजय शर्मा

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  26. व्यय विभाग ने बिना पुनर्विचार किये केस को रिजेक्ट किया है.उन्होंने सिर्फ सतही तौर पर बिना प्रतिवेदन को पढ़े पिछले आधार पर ही फिर से केस को रिजेक्ट कर दिया है ताकि इस पूरे मामले का समूल नाश किया जा सके.अगर अभी भी अनुवादक सोये रहे तो फिर कुछ भी नहीं बचेगा अब व्यय विभाग में असोसिअशन के पदाधिकारी स्वयं जाकर अधिकारियों से मिले और उन्हें पूरा केस समझाए तथा राजभाषा विभाग के अधिकारियों एवं अनुवादकों से भी मिले और उन्हें साथ लेकर व्यय विभाग जाए तथा पूरा मामला टी.पी.लीना केस सहित समझाए.जो कि पहले नहीं किया गया है जिसके कारण केस रिजेक्ट हुआ है .वैसे तो प्रारंभ में ही गलती हुई है व्यय विभाग के १३-११-२०००९ के आर्डर के आधार पर ही राजभाषा विभाग आदेश जारी कर सकता था.व्यय विभाग के पास मामला ले जाना ही गलत था.और अब गलती पर गलती दोहराई जा रही है.व्यय विभाग तो १३-११-२००९ के आर्डर के तहत सभी उन पदों को जो कि १-१-२००६ को ६५००-१०५०० के पूर्व निर्धारित वेतनमान में थे, को ४६०० ग्रेड वेतन दे चुका था .अब पुनः स्वीकृति की आवश्यकता क्या थी.इसीलिये व्ययविभाग इस पूरे केस को समझ कर भी अनदेखी कर रहा है और इसे दबा देना चाहता है.जिन्हें १३-११-२००९ का आर्डर समझ में आ गया है वे सीधे इस के आधार पर ४६०० ग्रेड वेतन ग्रांट कर रहे हैं.गलती को तुरंत सुधारने की आवश्यकता है अन्यथा परिणाम भयानक हो सकते हैं.ऐसा टी.पी लीना का भी कहना है.कृपया सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर CAT से अनुवादकों के पक्ष में आदेश जारी करवाएं अन्यथा बाद में हाथ मलने के सिवाय कुछ नहीं बचेगा.

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  27. मैं माधवी जी की प्रतिक्रिया से पूरा सहमति व्यक्त करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए आग्रह करता हूँ। इस प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता सूचित करते हुए एक प्रतिक्रिया 24 या 25 अगस्त को मैंने पोस्ट किया था जिसको अभी तक प्रकट नहीं किया है।

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    1. @ शरत कुमारजी,
      आपकी टिप्पणी 26 अगस्त को प्राप्त हुई थी जो "कैट में सुनवाई अब 20 सितम्बर को" शीर्षक वाली पोस्ट के लिए थी और वहां वह उसी दिन प्रकाशित कर दी गई थी जो अब भी दिख रही है।

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  28. आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय

    माधवी जी ठीक कह रही हैं कृपया सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर CAT से अनुवादकों के पक्ष में आदेश जारी करवाएं अन्यथा बाद में हाथ मलने के सिवाय कुछ नहीं बचेगा वैसे यह केस कैट/हाईकोर्ट/सुर्पीमकोर्ट से जीता जा चुका है दिक्‍कत क्‍या है समझ नहीं आ रही । बाबू लोगों का काम आपित्त लगाना तथा केस रिजेक्‍ट करना ही होता है । काशीकर जी अपनी टिप्‍पणियों के द्वारा
    सूचना मांगी है । अत: अनुरोध करता हूं कि नवीनतम जानकारी प्रदान की जाए जिससे अनुवादक भाईयों के मन को तसल्‍ली हो । कोर्ट केस करें सभी अनुवादक भाईयों से फीस लें हम भी अपना हिस्‍सा देने को तैयार हैं । बिना झिझक फीस की मांग की जा सकती है ।

    सादर सहित
    डा विजय शर्मा


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  29. आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय

    मैं माधवी जी की प्रतिक्रिया से पूरा सहमति व्यक्त करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए आग्रह करता हूँ। आवेदन पत्र राजभाषा विभाग में देकर कुछ नहीं होने वाला । संघ क्‍या कार्रवाई कर रहा है एक एम दिन बहुमूल्‍य है । अत: बिना बाबू लोगों के चक्‍क्‍र में पडे कोर्ट केस करें । यह बाबू महोशय तो हमें एमटीएस के पद नर भी नहीं देखना चाहते । देखिये स्‍तानक/स्‍तातकोतर का ग्रेड वेतन कम से कम 4600 तो होना ही चाहिए । अत: मिल बैठक कर तुरंत कार्रवाई करें तथा सभी से सांझा भी करें
    सादर सहित
    डा विजय शर्मा

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  30. अध्‍यक्ष महोदय
    अनुरोध है कि आदरणीय काशीकर जी की बातों को बडे ध्‍यान से सुने व उपयुक्‍त स्‍थान दें

    “एक गैर सीएसओएलएस अनुवादक होकर, सदस्य न होते हुए, इस ब्लॉग में एसोसिएशन की गतिविधियों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना शायद समुचित नहीं है, परंतु, संवर्गीय अनुवादकों के वेतनमान से हमारे वेतनमान/नियतन भी जुडे होने के कारण यदि मैं अपना विचार व्यक्त करता हूँ तो यह अनुचित भी नहीं होगा।

    यह अत्यंत दुखद स्थिति है कि ग्रेड पे 4600 का सारा वृत्तांत दूसरे ब्लॉग से मालूम करना पडता है जिसके बारे में अभी तक इस ब्लॉग में कुछ भी सूचना नहीं दी गई है।
    इससे यह विदित होता है कि एसोसिएशन अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं कर रही है और अनुवादकों के हित की रक्षा करने में भी वह असफल दिख रही है। अनुवादकों से गठित एसोसिएशन, अनुवादकों से चुने हुए उसके पदाधिकारी गण अनुवादकों की भलाई के लिए यदि काम नहीं करेगा तो उसका औचित्य ही क्या है। अप्रेल 13 में ही प्रतिवेदन को व्यय विभाग द्वारा ठुकराए जाने के तीन महीने बाद भी उस पर कोई कदम नहीं उठाना, अपने ही अनुवादक सदस्यों को गंभीर हालत से अवगत न कराते हुए उनको अंधेरे में रखना, यहाँ तक कि उनके प्रातिनिधिक पदाधिकारियों को ही त्याग-पत्र देने तक मजबूर करना - ये सभी यह इंगित करता है कि एसोसिएशन में कुछ भी ठीक नहीं है। यदि एसोसिएशन को लगता है कि अनुवादकों की निरीक्षा के अनुरूप काम करना संभव नहीं है तो पदाधिकारी अपने पद को स्वसंतोष से त्याग कर सुयोग्य, सक्रिय एवं सम्यक रूप से जिम्मेदारी का निर्वहण करनेवालों के लिए मार्ग प्रशस्त करना बेहतर होता है। एसोसिएशन के अपील पर अनुवादक वर्ग इस मामले में अपने स्तर पर कोई कार्रवाई न करते हुए एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे कदम पर विश्वास करके आशान्वित बैठा है लेकिन उसके अनुरूप कोई काम अब तक नहीं हुए हैं। कृपया एसोसिएशन के समस्त पदाधिकारी इस पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। स्नातक/स्नातकोत्तर या उससे अधिक उपाधि के साथ सुशोभित अनुवादक वर्ग की इस हालत पर, बेबसी पर क्या कहें?

    ग्रेड पे 4600 प्रदान करने के मामले में यह पता नहीं चला कि व्यय विभाग द्वारा अनुवादक-सहायक प्रैरिटी असंभव कहकर 4600 नहीं दिए जा सकने की बात दोहराते हुए इस मामले को पहले ही खारिज करके आदेश भी जारी हो जाने के बाद भी उसी कारण देते हुए ग्रेड पे का अनुरोध कैसे किया गया?

    प्रतिवेदन देते समय तो यह बात बिलकुल स्प्ष्ट हो चुकी थी कि यदि ग्रेड पे 4600 के लिए लडने के लिए एक मात्र सहारा श्रीमती टी पी लीना जी के कोर्ट का आदेश है। विदित है कि प्रतिवेदन में भी इस तथ्य को ठीक तरीके से प्रतिपादित किया गया था। अभी व्यय विभाग से मिली टिप्पणी में इसकी कोई जिक्र नहीं है तो लापरवाही कहाँ हुई है?

    फिलहाल,मेरी सीमित बुद्धिशक्ति के अनुसार, यह कदम उठाना बेहद जरूरी लगता है कि "अंतिम प्रयत्न के रूप में" एक प्रतिनिधि मंडल (जिसमें एसोसिएशन के पदाधिकारी और गैर पदाधिकारी/ विशेषज्ञ भी शामिल हों जो इस मसले के आदि-अंत को जानते हैं ताकि इस मामले को पूरी ताकत के साथ प्रस्तुत किया ज सके) पूरी तैयारी के साथ सारे दस्तावेज सहित राजभाषा विभाग, जरूरत पडने पर व्यय विभाग, के उच्च स्तरीय अधिकारियों से भेंट करके मुख्य रूप से उपर्युक्त कैट केस का सदाशय और आदेश के बारे में उनको समझाना चाहिए साथ में यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि यह सहायकों से पैरिटि से कतई संबंधित नहीं है। और, 24/27.11.08 तथा 13.09.09 को जारी आदेशों के इंटरप्रिटेशन में जो तकनीकी समस्यायें हैं जिसका समाधान/स्पष्टीकरण माननीय कोर्ट ने आदेश के रूप में दिए हैं, उसे स्पष्ट करना चाहिए। इसके अलावा अन्य विषय जैसे, अत्यंत विरल पदोन्नति के अवसर, अनुवादकों को अनुवाद के अलावा दिए जा रहे अन्य कार्य, अनुवादकों की नियुक्ति के लिए सहायकों से ज्यादा अनिवार्य शैक्षिक अर्हता की आवश्यकता आदि से भी अवगत कराकर 4600 ग्रेड पे प्रदान किए जाने पर सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने के लिए अनुरोध किया जा सकता है। यदि इसका सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली तो ठीक है नहीं तो अंततोगत्वा अदालत का दरवाजा खटखटाना ही हमारी मजबूरी होगी। हाथ पर हाथ धरे बैठने से कुछ हासिल नहीं होगा। जो भी करना है बिना समय गंवाए अति शीघ्रता से करना है। इस संबंध में प्राथमिकता देते हुए एसोसिएशन् पूरी ताकत लगाकर गोल हासिल करने का विनम्र अनुरोध करता हूँ।“

    अभी भी मैं आशा करता हूँ कि मेरी प्रतिक्रियाएँ (दूसरी भी) प्रकट होंगी (?)

    डा विजय शर्मा

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  31. आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय

    4600 ग्रेड वेतन संबंधी क्‍या प्रगति है जानकारी दी जाए

    सदेव धन्‍यवादी हूंगा ।

    सादर सहित
    डा विजय शर्मा

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  32. Some of my friends suggested that on illustration 4-A of CCS(RP) Rules, 2008 vide which JHTs could try to get their pay fixed straightaway to Rs.4600/-. On this issue, my views/findings are as follows:

    1. Illutration 4-A of Notification of MOF, DOE dtd.29/08/2008 is applicable only for those pay fixation cases where the posts have been upgraded. The pay scale of JHTs was Rs.5500-9000 till 31/12/2005, in other words, till introduction of 6th CPC recommendations w.e.f.1/1/2006, the pay scale was Rs.5500-9000 only. On 1/1/2006, the pay scale of Rs.6500-10500 was recommended notionally for JHTs and fixed the corresponding grade pay of Rs.4200 vide DOE OM dtd.24/11/2008 and subsequent corrigendum 27/11/2008. It means, that was only a recommendation and in any point of time, the pay scale of 6500-10500 was not granted at all to the JHTs (even prior to the introduction /implementation of of 6th CPC) and their pay was fixed to 4200. When the pay scale of JHT was not at all upgraded, the question of requesting to fix the pay of JHT under 4-A does not arise.

    2. When the pre-revised pay scale of JHT was Rs.5500-9000 prior to the implementation of 6th CPC recommendations, JHT is not covered under DOE OM dtd.13/11/2009 vide which the posts which were in the pre-revised pay scale of Rs.6500-10500 as on 1/1/2006, have bee replaced in the GP of 4600. Hence OM dtd.13/11/2009 also does not apply to the JHTs. DOE it self has already clarified this.

    3. Since the GP of the post of JHT was fixed @ Rs.4200 vide DOE OM dtd.24/27.11.2008, the first and second financial upgradations under MACPS were given to the GP og 4600 and 4800 respectively.

    4. No doubt, there is a technical/logical problem in interpreting the OM dated 24/27.11.2008 about applicability of pay scale/ grade pay of JHTs. Smt.T P Leena, in her court case, has pleaded this issue very sensibly and logically in a different way and finally Hon’ble court has also arrived to the conclusion and ordered that the Grade Pay of JHTs should be Rs.4600 and accordingly, the I/II financial upgradations under MACPS should be granted to Rs.4800/5400 respectively. This case is undoubtedly proved that the GP of the post of JHT should be Rs.4600.

    In view of the above, now only way left out is either Association or Anuvaad Manch (or preferably both) delegates try to convince Rajabhasha/DOE officials about the issue purely on the basis of the Smt.T P Leena’s court case and make them to understand clearly with all supporting documents. In case of negative situation- fail to do so by Association/Anuvaad Manch or the said officials are not convinced, vice versa, then as a last resort we will have to approach Court without further delay which will be the ‘Final Destination’ for JHTs.

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  33. महोदय, ग्रेड वेतन 4600/- के बारे में व्‍यय विभाग जो तर्क दे रहा है वह अनुचित है क्‍योंकि सहायकों (Assistants) जिन्‍हें 4600/- ग्रेड वेतन दिया गया है उन्‍हें किस आधार पर दिया गया है यदि RTI में उस कार्यवाही की नोटशीट मांगें तो शायद हमारे पक्ष में कुछ सकारात्‍मक बिंदु मिल सकते हैं । दूसरी बात सारे मंत्रालयों में ऐसे कौन से पद हैं जिनके लिये नियुक्ति हेतु न्‍यूनतम स्‍नातकोत्‍तर (Post Graduation)की शैक्षणिक योग्‍यता हो तथा उनका ग्रेड वेतन 4200/- है । इस प्रकार से यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करें तो सफलता अवश्‍य मिलेगी । एसोसिएशन के बंधु इस बात को गंभीरता से लेकर प्रयास करें । यही निवेदन है । धन्‍यवाद ।
    श्रीनिवास येचूरी ।

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  34. Respect Chairman Sir,

    Kindly see the blog of Mr. S.N.Kashikar and please act accordingly. There is no doubt that court case of T.P.Leena can help us and solution of this is court case. Kindly act fast.

    Regards
    Dr.Vijay Sharma

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  35. Respect Chairman Sir,

    Kindly see the blog of Mr. S.N.Kashikar and please act accordingly. There is no doubt that court case of T.P.Leena can help us and solution of this is court case. Kindly act fast.

    Regards
    Dr.Vijay Sharma

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  36. राजभाषा अनुवादक संघ के समस्त साथियों के हिंदी दिवस के शुभावसर पर बहुत-बहुत बधाई है प्रभु से यह मेरी कामना है कि हिदी अनुवादक संघ सभी साथियों को साथ लेकर हिंदी अनुवादकों के हितों की रक्षा का एक मंच बने ।
    सादर सहित

    डा विजय शर्मा

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  37. DOPT ने एक OM 19-9-2013 को जारी किया है जिसके अनुसार SUBORDINATE OFFICES के OL कैडर के वेतनमानों को CSOLS के समान करते हुए क.अनुवादकों को 4200 ग्रेड पे ही दिया है.अब इस OM को स्पष्टीकरण के तौर पर पेश किया जाएगा.हमारी लड़ाई अब और कठिन हो गयी.हम लक्ष्य से बहुत दूर पहुँच गए मात्र कुछ भयंकर लापरवाहियों के कारण .और व्यय विभाग ने DOPT से पुनः OM जारी करवाकर सारी आशाओं पर तुषारापात कर दिया .असोसिएशन कुम्भकरण की नींद सोती रह गयी बार-बार जगाने के बाद भी.टी.पी.लीना की लड़ाई भी लगता है व्यर्थ गयी...माधवी

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  38. काम रूका नहीं,जारी है दोस्तो.....Granting Grade Pay of Rs. 4600/- to Junior Hindi Translators-
    काम अभी रुका है, दोस्‍तो 4600/- ग्रड वेतन संबंध तत्‍काल कार्रवाई अपेक्षित है । अपने
    साथियों को साथ लेकर चलो तथा बिना रुके तुरंत कार्रवाई की जाए । डा विजय शर्मा

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अपनी पहचान सार्वजनिक कर की गई आलोचना का स्वागत है। किंतु, स्वयं छद्म रहकर दूसरों की ज़िम्मेदारी तय करने वालों की और विषयेतर टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।