*BREAKING: *राजभाषा विभाग के दिनांक 3 जुलाई,2018 के कार्यालय-ज्ञापन के संदर्भ में,2016-17 की रिक्तियों के लिए वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति का कार्य प्रगति पर; डीपीसी की बैठक अगस्त में ही संभावित। *उप-निदेशक(राजभाषा) के तौर पर पदोन्नति हेतु संयुक्त सेवावधि के प्रावधान को बहाल करने का प्रस्ताव राजभाषा विभाग के विचाराधीन। *सहायक निदेशकों को रिवर्ट किए जाने के खिलाफ दायर मामले में कैट,दिल्ली ने 22 मार्च,2018 को सुनवाई करते हुए स्थगन आदेश जारी किया। *रिवर्ट किए गए सहायक निदेशकों से रिफंड लेने का नियम नहीं।

Wednesday, 7 December 2016

सचिव से मुलाक़ात कर लंबित मुद्दों से अवगत कराया

मित्रो,
आज दोपहर बाद, अनुवादक एसोसिएशन के सदस्यों ने सचिव(राजभाषा) महोदय से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें लिखित रूप में संवर्ग के लंबित मुद्दों से ्अवगत कराया। सचिव महोदय ने एसोसिएशन के साथ अगले कुछ दिनों में लम्बी बैठक करने की बात कही ताकि बक़ाया मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके। बहरहाल,एसोसिएशन ने आज सौंपे गए अनुरोध-पत्र में मुख्यतः निम्नांकित तथ्यों की ओर ध्यानाकर्षण किया हैः


1) वरिष्‍ठ अनुवादक से सहायक निदेशक के पद पर प्रोन्‍नति- इसके लिए लगभग तीन माह पूर्व कार्रवाई शुरू हो चुकी है। लगभग सभी पात्र वरिष्‍ठ अनुवादकों से ए पी ए आर एवं सतर्कता रिपोर्टें प्राप्‍त हो गई हैं। शेष अनुवादकों को कई बार अनुस्‍मारक दिए जा चुके हैं। अब अनुरोध है कि डी पी सी की बैठक आयेजित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी जाए और जिन वरिष्‍ठ अनुवादकों से अपेक्षित रिपोर्टें प्राप्‍त नहीं हुई हैं उनके लिए स्‍लॉट छोड़ दिया जाए। इससे लंबे समय से प्रोन्‍नति के लिए प्रतीक्षारत वरिष्‍ठ अनुवादकों को न्‍याय मिल सकेगा। महोदय विगत में कई कनिष्‍ठ अनुवादक अपने पूरे सेवाकाल में वरिष्‍ठ अनुवादक के रूप में एक मात्र प्रोन्‍नति लेकर सेवानिवृत्‍त हो गए हैं। अनुरोध है कि भविष्‍य में संवर्ग को ऐसी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति से बचाए जाए। साथ ही यह अनुरोध भी है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अनुदेशानुसार, भावी रिक्तियों (वर्ष 2016-17) के लिए अग्रिम पैनल भी तैयार कर लिया जाए। 

2) कनिष्‍ठ अनुवादक को दिनांक 01.01.2006 से 4600 रु. ग्रेड पे दिलाया जाना-कैट के एर्नाकूलम बैंच द्वारा दिए गए निर्णय, जिसे केरल उच्‍च न्‍यायालय एवं उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा वैध ठहराया गया है, के अनुसरण में भारत सरकार के कई अधीनस्‍थ कार्यालयों में कार्यरत कनिष्‍ठ अनुवादकों को 01.01.2006 से 4600/- रु. का ग्रेड पे दिया गया है। उल्‍लेखनीय है कि अधीनस्‍थ कार्यालयों में छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट के लागू होने से पहले कनिष्‍ठ अनुवादक का कम वेतनमान था। छठे वेतन आयोग ने वेतनमान को एक समान किया ओर अब उन्‍हें उच्‍चतर ग्रेड पे दिया जा रहा है जो हमारे संवर्ग के कनिष्‍ठ अनुवादकों के मनोबल को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है। सचिव महोदय को बताया गया कि  इस विसंगति को दूर करने के लिए दिनांक 27.07.2016 को विभाग को लीगल नोटिस तामील कराया गया था जिसमें एक माह का समय दिया गया था। किंतु 4 माह समाप्‍त हो जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एसोसिएशन आपसे विनम्रतापूर्वक आग्रह करती है कि विसंगति को दूर करवाने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने का अनुदेश दिया जाए। सचिव महोदय को जानकारी दी गई कि जुलाई, 2011 में संवर्ग के पुनर्गठन का अनुमोदन प्राप्‍त होने के बावजूद परिणामी पदों पर प्रोन्‍नति की कार्रवाई अभी तक पूरी नहीं हुई है, परिणामस्‍वरूप संवर्ग के प्रत्‍येक पद श्रेणी में बहुतायत से पद रिक्‍त हैं। 

3) कनिष्‍ठ अनुवादक एवं वरिष्‍ठ अनुवादक के पदनाम को बदलकर कनिष्‍ठ अनुवाद अधिकारी एवं वरिष्‍ठ अनुवाद अधिकारी किया जाना: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा सी एस एस संवर्ग में एल डी सी, यू डी सी एवं सहायक के पदनाम को बदलकर क्रमश: कनिष्‍ठ सचिवालय सहायक, वरिष्‍ठ सचिवालय सहायक एवं सहायक अनुभाग अधिकारी किया गया है। इसी तर्ज पर एसोसिएशन ने विभाग से कनिष्‍ठ अनुवादक एवं वरिष्‍ठ अनुवादक का पदनाम बदलकर कनिष्‍ठ अनुवाद अधिकारी एवं वरिष्‍ठ अनुवाद अधिकारी किए जाने का अनुरोध राजभाषा विभाग से किया है। इससे संवर्ग में कार्यरत कनिष्‍ठ अनुवादकों एवं वरिष्‍ठ अनुवादकों के भी मनोबल का संवर्धन होगा। उल्‍लेखनीय है कि इसमें कोई Financial implication भी नहीं है। 

एसोसिएशन ने सचिव महोदय को अवगत कराया कि वर्तमान में सवंर्ग में एक बहुत ही विचित्र एवं निराशाजनक स्थिति व्‍याप्‍त है क्योंकि जुलाई, 2011 में संवर्ग के पुनर्गठन का अनुमोदन प्राप्‍त होने के बावजूद परिणामी पदों पर प्रोन्‍नति की कार्रवाई अभी तक पूरी नहीं हुई है, परिणामस्‍वरूप संवर्ग के प्रत्‍येक पद श्रेणी में बहुतायत से पद रिक्‍त हैं। राजभाषा विभाग के स्‍वयं के आकलन के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत पद रिक्‍त हैं और फीडर ग्रेड में अधिकारी/कर्मचारी प्रोन्‍नति के लिए पात्र नहीं है। कारण यह है कि विभाग द्वारा डी पी सी की बैठक समय पर आयोजित नहीं की जाती है। अधिकारी/कर्मचारी कई वर्षों तक तदर्थ आधार पर कार्य करते रहते हैं और अगली प्रोन्‍नति के लिए उनकी अर्हता (eligibility) की गणना डी पी सी की तारीख से की जाती है जिससे वर्षों तक तदर्थ आधार पर की गई सेवा बेकार जाती है। यदि विभाग द्वारा डीओपीटी के अनुदेश के अनुसार समय पर डीपीसी की बैठक कर ली जाए तो इस कुचक्र से संवर्ग को बचाया जा सकेगा। विगत में विभाग द्वारा हुई इस गंभीर चूक का निराकरण भी आप जैसे सक्षम अधिकारी के असाधारण प्रयास से ही संभव है। निवेदन है कि भविष्‍य में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा निर्धारित अंतराल पर डीपीसी की बैठक आयोजित किया जाना एवं अग्रिम रूप से पैनल तैयार किया जाना सुनिश्चित करने के लिए निदेश दिया जाए। एसोसिएशन ने दिनांक 21.11.2016 को विभाग को प्रस्‍तुत अभ्‍यावेदन की प्रति भी सचिव महोदय को उपलब्ध कराई। 

भविष्य की पहलों से भी सभी साथियों को अद्यतन रखा जाएगा।
                                                                                                                      

6 comments:

  1. The post of Junior and Senior Translators should be merged and common grade pay of Rs4800/- should be demanded from 01.01.2016

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  2. The post of junior and senoir translators should be merged and renamed as language officer with a common grade pay of rs 4800/-

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  3. It is humble request to the members of Association to take the cause of Translators of Subordinate Offices also because there plight is not only miserable but also pathetic since there are no promotional avenues at all . They all retire in the same post initially in which they are appointed.

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  4. Dear comrades, what is going on 50 vacancy of Assistant Director (OL) recruitment process, should you update it....

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  5. If csols gives their candidate to a Dept first then could it take the transfer of that same candidate at any other dept as candidate's
    requirements or if is there any possibility for him or her to take the transfer to any other ministry or Dept.

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  6. If csols gives their candidate to a Dept first then could it take the transfer of that same candidate at any other dept as candidate's
    requirements or if is there any possibility for him or her to take the transfer to any other ministry or Dept.

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