*BREAKING: *राजभाषा विभाग के दिनांक 3 जुलाई,2018 के कार्यालय-ज्ञापन के संदर्भ में,2016-17 की रिक्तियों के लिए वरिष्ठ अनुवादकों की पदोन्नति का कार्य प्रगति पर; डीपीसी की बैठक अगस्त में ही संभावित। *उप-निदेशक(राजभाषा) के तौर पर पदोन्नति हेतु संयुक्त सेवावधि के प्रावधान को बहाल करने का प्रस्ताव राजभाषा विभाग के विचाराधीन। *सहायक निदेशकों को रिवर्ट किए जाने के खिलाफ दायर मामले में कैट,दिल्ली ने 22 मार्च,2018 को सुनवाई करते हुए स्थगन आदेश जारी किया। *रिवर्ट किए गए सहायक निदेशकों से रिफंड लेने का नियम नहीं।

Tuesday, 15 September 2015

सहायक निदेशक की सीधी भर्ती के लिए पदों की गणना को ठीक करवाने की आवश्यकता

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय ने सहायक निदेशक (रा.भा.) के 50 पदो के लिए सीधी भर्ती की रिक्‍ति संघ लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापित(सं. 12/2015) की जा चुकी है। राजभाषा विभाग ने संवर्ग पुनर्संरचना को रिक्तियां उत्पन्न होने का आधार बताया गया है जबकि विभाग के ही दिनांक 12. 09. 2011 के संवर्ग समीक्षा विषयक कार्यालय ज्ञापन संख्या 15 /3 /2005 -रा. भा. (सेवा) तथा सम्बंधित नोटिंग में स्पष्ट उल्लेख है कि परिणामी रिक्तियां (112) पदोन्नति से भरी जाएंगी। यदि नियमानुसार संवर्ग पुनर्संरचना के उपरांत परिणामी रिक्तियों को वर्ष 2011 में पदोन्नति से भर लिया जाता और उसके बाद रिक्तियों को       75 :25 (पदोन्नति:सीधी भर्ती) के अनुपात में भरने की प्रक्रिया अपनाई जाती तो सीधी भर्ती के कोटे में पदो की संख्या कम होती। इस मुद्दे को राजभाषा विभाग, संघ लोक सेवा आयोग, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री आदि के साथ उठाया गया किन्तु इसका निराकरण नहीं हो पाया। अब सीधी भर्ती कोटे के पदो की गणना सही करवाने के लिए न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं रह गया है। इसके लिए संवर्ग के अनुवादकों से वित्तीय , नैतिक  एवं बौद्धिक सहयोग अपेक्षित है ताकि हम अपने हक़ की लड़ाई को अंजाम तक पंहुचा सकें। विश्वास है कि अनुवादक बंधु अपने अमूल्य सहयोग प्रदान करने में तत्परता दिखाएंगे और अपने हक़ को प्राप्त करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।

16 comments:

  1. For departmental candidates, there shouldn't have been any age bar, especially for csols cadre candidates. Union should have thought and approached appropriate authorities for this. This step should have been taken when RRs were being finalized/published.

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  2. On what basis 50 posts have been counted. If this 50 is 25% then, 75% posts ie. 150 posts would be filled by promotion, Do we have as many posts vacant, if not, why this intentional wrong calculation. 25% of vacant posts and not of total strength of ADs should have been advertised. I think 70 odd posts of ADs are vacant and for that 17 odd posts should have been advertised. This is grave error. Further, so much of urgency is being shown for these 25% posts and no care is being taken for rest 75% posts. we were told that DPC for 94 posts was conducted couple of months back but orders for the same still have not been issued. Can one ask, why this delay. Tomarrow, these 50 people will come and supersede you. These orders should be issued at the earliest. Thanks.

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  3. Dr Rita Kuriakose25 October 2015 at 14:48

    what I understand is that after the cadre restructuring 44 posts were created and if so only 11 posts should have been notified for direct recruitment by UPSC . I dont know why only this cadre has such a curse of no promotions although we are post graduates at the entry level itself. Just imagine the new recruits coming and sitting over us .

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  4. This is really pathetic. OL dept is not listening and union is as ever silent or rather gone into hibernation. Officers union has filed a case but our leaders are nowhere to be seen.

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  5. इस संबंध में सूचित करने के लिए धन्यवाद। क्या माननीय न्यायालय में मामला दायर करने के संबंध में कोई निर्णय लिया गया है जिससे तदर्थ सहायक निदेशकों और अनुवादकों को उनका हक दिलाया जा सके?

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  6. वाद दायर करने का मामला अंतिम दौर में है। वकील की फीस और आर्थिक मामलों में अनुवादक साथियों की अन्यमनस्कता विलम्ब का मूल कारण है।

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  7. बहुत अच्छा प्रयास। हम आपके साथ हैं।

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  8. क्‍या अच्‍छा प्रयास है आज 17 नवंबर तक किसी भी प्रगति की कोई सूचना नहीं है ।

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  10. Bhopal Singh
    1. General Body meeting should be called immediately.
    2. All funds should be taken from earlier association.
    3. All income and expenditure should be placed in General Body meeting.
    4. An unanimous decision should be taken for the benefit of translators.
    5. Some of the translators were asked by CAT to approach 7th CPC, but they have repeated the mistake of earlier association.

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  11. one must be transparent
    be bold enough to face your acts & deeds
    bhopal singh

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  12. ग्रेड वेतन मामले में कोई फैसला नहीं, मामला 7वें वेतन आयोग को संदर्भित किया गया
    प्रिय मित्रो, कैट के अादेश की प्रति आप सबके ध्‍यानार्थ प्रस्‍तुत है. अब इसे न्‍याय कहा जाए या कुछ और आप स्‍वयं तय कर सकते हैं. यह एक बेहद निराशाजनक और अप्रत्‍याशित फैसला है. और सबसे आश्‍चर्य की बात यह है कि कैट ने न तो अनुवादकों के दावे को खारिज किया और न ही अनुवादकों के पक्ष में फैसला दिया. बल्कि इस मामले में प्रतिवादी पक्ष को इस मामले को 7वें वेतन आयोग को संदर्भित करने के आदेश दिए हैं और आशा व्‍यक्‍त की है कि 7वां वेतन आयोग विभिन्‍न ट्रिब्‍यूनल, उच्‍च न्‍यायालयों और सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेशों का सम्‍मान करेगा. यह समझ से परे है कि 7वां वेतन आयोग किस प्रकार छठे वेतन अायोग के उपरांत सरकारी आदेशों से उत्‍पन्‍न हुई विसंगतियों को दूर करेगा ?
    अादेश का अंतिम पैरा कहता है



    "Having regard to the law declared by the Honble Supreme Court (ibid), we dispose of the present Original Application with direction to the respondents to refer the grievance of the applicants regarding their grade pay to the 7th CPC for its recommendation. We are sanguine while giving its report, the Pay Commission will give due regard to the Orders of the Tribunal, Honble High Courts and the Apex Court, relied upon the learned counsels for the parties. No costs."



    इसी के साथ न्‍यायालय ने वेतन संबंधी मामलों को ज्‍यूडिशियरी के बजाए ब्‍यूरोक्रेसी द्वारा ही तय किए जाने के संबंध में तमाम दलीलें दी हैं. यहां यह भी समझ से परे है कि ब्‍यूरोक्रेसी के आदेशों से यदि विसंगतियां उत्‍पन्‍न हो रही हों और कोई विवाद हो तो क्‍या वह अदालत के हस्‍तक्षेप का मामला नहीं हो जाता है ? जैसा कि इस मामले में हुआ. अदालत की मंशा पर टिप्‍पणी करने का हमारा कोई अधिकार नहीं है. मगर यह आदेश स्‍वयं में सिस्‍टम, अदालतों और न्‍याय के लिए संघर्ष के औचित्‍य के विषय में कई बातों को रेखांकित करता नज़र आता है, जिन्‍हें केवल समझा जा सकता है, मगर उन पर सार्वजनिक मंच पर चर्चा नहीं की जा सकती.

    इस फैसले ने यकीनन हम सभी को निराश किया है. अब, आगे क्‍या किया जा सकता है, इस विषय में हम लोग भी विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं और आप सबकी राय भी आमंत्रित है.

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  13. What is the real progress ..... Please circulate the information...

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  14. all the ministries, subordinate offices are vigorously fighting to give higher gp to ldc and udc. why the rajbhasha vibhag and csols people are not fighting for gp of rs4600/- to hindi translators of subordinate offices.

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  15. why the rajbhasha vibhag and csols is not fighting for gp of rs 4600/- for hindi translatorsof subordinate offices when all the ministeries are bent upon to give higher payscales to ldc and udc.

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